Ghaziabad: चमत्कारी माना जाता है देवी महामाया का मंदिर, 1857 की क्रांति से है गहरा नाता


रिपोर्ट : विशाल झा

गाजियाबाद. गाजियाबाद के मोदीनगर में देवी महामाया मंदिर काफी प्राचीन है. नवरात्र के समय इस मंदिर में विशेष भीड़ रहती है. सुबह 4 बजे से ही भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ता है. मां के दर्शन के लिए मंदिर में भक्त न केवल गाजियाबाद बल्कि भारत के विभिन्न राज्यों से आते हैं. भक्त अपनी पीड़ा और इच्छा मां के सामने रखते हैं. फिर मां उन पर चमत्कार करती है. यह दावा है मंदिर में पिछले 17 साल से प्रसाद लगाने वाले मनोज का. उन्होंने News18 Local को बताया कि यहां जो भक्त आते हैं, उनको माता के पास भेजने का काम हम करते हैं. हम उन्हें प्रसाद देते हैं जो वह माता पर जाकर चढ़ाते हैं. यही काम हमें रोजगार देता है. अगर मंदिर नहीं होता तो शायद दो वक्त की रोटी भी नहीं मिल पाती.

मंदिर 550 वर्ष पुराना बताया जाता है. नवरात्र आते ही यहां मेला लगना शुरू हो जाता है. जो 9 दिन तक मंदिर परिसर में लगा रहता है. नवरात्र के 9 दिनों में प्रसाद बेचने वालों के लिए कमाई का एक सुनहरा मौका होता है. जिससे उनका कुछ महीनों का खर्च निकल जाता है. मंदिर की एक खास बात ओर है. यहां एक वटवृक्ष भी है, जिसे शहीदों का वटवृक्ष कहा जाता है.

दुकानदार के साथ चमत्कार हो गया

कहते हैं जो कोई भी सीकरी माता से पूरे मनोयोग से कामना करता है मां उसकी मनौती जरूर पूरी कर देती हैं. प्रसाद बेचने वाले अजय ने बताया ‘एक दिन मैं बहुत ज्यादा परेशान हो गया था, क्योंकि बच्चों की फीस भरनी थी. तब मैं मंदिर गया और मां से सच्चे दिल से प्रार्थना की. तभी मुझे मंदिर के पास प्रसाद लगाने का ठेका मिल गया. यह मेरे लिए काफी चौंका देने वाला समय था. तब से आज तक लगभग 12 वर्ष हो गए मुझे मैया की सेवा में’.

जान बचाने के लिए मंदिर में छुपे थे लोग

अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में भी मंदिर का अहम योगदान बताया जाता है. अंग्रेजों द्वारा गांव को घेर कर तोप से गोले और बंदूक से गोलियों की बौछार कर दी गई थी. भारी संख्या में गांव के लोग शहीद हो गए. कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए मंदिर के नीचे बने तहखाने में जाकर छुप गए थे. जिन्हें अंग्रेजों ने पकड़कर मंदिर के बरगद पेड़ पर फांसी पर लटका दिया था. तब से यह बरगद का पेड़ 1857 की क्रांति की गवाही दे रहा है.

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