यूपी हार के बाद भी सपा का साथ नहीं छोड़ेगी रालोद; लोकसभा चुनाव के लिए जयंत चौधरी ने बताया प्लान

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Chunav) में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) संग गठबंधन में मिली हार के बाद भी रालोद प्रमुख जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary) का मिजाज नहीं बदला है. यूपी चुनाव (UP Election 2022) में मिली हार के बाद राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के नेता जयंत चौधरी ने ऐलान किया कि वह 2024 का लोकसभा चुनाव भी अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के साथ ही मिलकर लड़ेंगे. जयंत ने दावा किया कि उन्होंने भाजपा को उन क्षेत्रों में हराया जो सांप्रदायिक दंगों से सबसे अधिक प्रभावित थे और जहां हिंदू निवासियों के पलायन के मुद्दे को उठाया गया था.

पश्चिम यूपी में गठबंधन के खराब प्रदर्शन पर NDTV के सवालों के जवाब में जयंत चौधरी ने कहा कि उनके गठबंधन ने चुनाव में प्रभाव डाला और उन्होंने मुजफ्फरनगर, शामली और मेरठ में भाजपा को हराया, जो सबसे अधिक सांप्रदायिक दंगे प्रभावित क्षेत्र हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा ने कैराना में हिंदुओं के पलायन के मुद्दे को हवा दी, हमने उन्हें वहां हरा दिया.

जयंत चौधरी ने कहा कि संगीत सोम, उमेश मलिक और सुरेश राणा जैसे भाजपा के दिग्गज पश्चिम यूपी में अपनी सीटें हार गए. चौधरी ने दावा किया कि किसानों के आंदोलन का चुनाव परिणामों पर प्रभाव पड़ा. हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी पार्टी जनता तक अपना संदेश बहुत प्रभावी ढंग से नहीं पहुंचा सकी.

रालोद प्रमुख ने विपक्ष की हार के लिए मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी के खराब प्रदर्शन को भी जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि हमने इस चुनाव से बहुत कुछ सीखा है. मैं आपको बता सकता हूं कि हम 2024 का लोकसभा चुनाव भी अखिलेश यादव के साथ लड़ेंगे. उन्होंने दावा किया कि भाजपा से नाराज होने के बावजूद लोगों ने इसे अपने वोटों में नहीं दिखाया.

बता दें कि रालोद ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 33 सीटों पर उम्मीदवार उतारे लेकिन केवल 8 सीटों पर जीत हासिल की और 2.85% वोट शेयर हासिल किया. हालांकि, यह 2017 के चुनावों की तुलना में एक बड़ी छलांग है, जब वह सिर्फ एक सीट जीतने में सफल रही थी.

भाजपा और उसके सहयोगियों ने राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य की 403 सीटों में से कुल 273 सीटें जीतीं. यह 2017 की जीती सीटों से 49 सीटें कम हैं. अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली पार्टी ने अपने दम पर 111 सीटें जीतीं और उसके नेतृत्व वाले गठबंधन ने 125 निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की.

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