योगीराज में नहीं चला ट्रस्ट के बहाने जमीन हड़पने का खेल, कांग्रेस नेता समेत एक दर्जन लोगों पर FIR yogi government lodge fir against former congress mp son and 12 others in Raebareli over kamla nehru trust issue upns

योगीराज में नहीं चला कमला नेहरू ट्रस्ट के बहाने जमीन हड़पने का खेल


योगीराज में नहीं चला कमला नेहरू ट्रस्ट के बहाने जमीन हड़पने का खेल

बता दें कि रायबरेली (Raebareli)-प्रयागराज (Prayagraj) एनएच- 30 पर सिविल लाइंस पर करोड़ों की कीमत की जमीन पर लंबे समय से बड़े-बड़े लोगों की नजरें लगी थी

रायबरेली. सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के संसदीय क्षेत्र रायबरेली (Raebareli) में उनकी ही पार्टी की पूर्व सांसद शीला कौल के पुत्र विक्रम कौल समेत 12 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है. जिसमें तत्कालीन एडीएम एफआर मदन पाल आर्य, सब रजिस्ट्रार घनश्याम, प्रशनिक अधिकारी विंध्यवासिनी प्रसाद, नजूल लिपिक राम कृष्ण श्रीवास्तव और कमला नेहरू ट्रस्ट के सचिव सुनील देव एवं गवाह सुनील तिवारी के विरूद्ध भी एफआईआर दर्ज की गई है. डीएम के निर्देश पर दर्ज हुई एफआईआर के बाद कांग्रेस खेमे से लेकर प्रशानिक तंत्र में हड़कंप मच गया है. सभी आरोपियों पर कागजों में हेराफेरी करके नजूल की जमीन का फ्री होल्ड कराने का आरोप लगा है.

जानकारी के अनुसार, रायबरेली के अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व प्रेम प्रकाश उपाध्याय ने शहर कोतवाली में एक दर्जन लोगों पर एफआईआर दर्ज करवाई है. शहर कोतवाली पुलिस ने कमला नेहरू एजुकेशन सोसायटी से जुड़े लोगों के साथ-साथ रायबरेली के पूर्व एडीएम एफआर मदनपाल आर्या सहित कांग्रेस की पूर्व सांसद शीला कौल के बेटे विक्रम कौल समेत 12 लोगों पर आईपीसी की धारा 417, 420, 467, 468, 471, 474 समेत सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की धारा 4 व 5 में मामला दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू कर दी है.

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बता दें कि रायबरेली-प्रयागराज एनएच- 30 पर सिविल लाइंस पर करोड़ों की कीमत की जमीन पर लंबे समय से बड़े-बड़े लोगों की नजरें लगी थी. जिसको पाने के लिए लंबे समय से राजनीतिक नेताओं ने अपने-अपने दांव चले. कांग्रेस की पूर्व सांसद शीला कौल इस ट्रस्ट की फाउंडर सदस्यों में एक रहीं, उनके बेटे विक्रम कौल ने ट्रस्ट के नाम जमीन हथियाने के लिए तत्कालीन अधिकारियों के साथ मिलकर अभिलेखों में छेड़-छाड़ कर फ्रीहोल्ड करवाया. लेकिन करोड़ों की जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका. क्योंकि इस जमीन पर दशकों से सैकड़ों परिवार काबिज होकर जीवन यापन कर रहे थे.दस्‍तावेजों में मिली गड़बड़ी
एडीएम वित्त एवं राजस्व प्रेम प्रकाश उपाध्याय ने सिटी मजिस्ट्रेट से अभिलेखों की जांच करने के निर्देश दिए थे. जहां दस्तावेजों में कई जगह सफेदा लगा था. इसके अलावा नजूल भूमि के बैनामे में तत्कालीन डीएम की अनुमति नहीं थी. इस मामले में सिटी मजिस्ट्रेट की जांच के आधार पर हमने कोतवाली में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया है. बताया जा रहा है कि विवेचना होने पर अन्य तत्कालीन बड़े अफसर भी जांच के घेरे में आएंगे. फिलहाल अभी तक किसी भी प्रशनिक अधिकारी ने इस मामले पर कुछ नही बोला है।






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