वाराणसी-कानपुर में भी लागू होगा पुलिस कमिश्नर सिस्टम? प्रस्ताव तैयार

योगी सरकार पंचायत चुनाव की अधिसूचना से पहले बड़े फैसले लेने की तैयारी में है.  (File Photo)
योगी सरकार पंचायत चुनाव की अधिसूचना से पहले बड़े फैसले लेने की तैयारी में है.  (File Photo)


योगी सरकार पंचायत चुनाव की अधिसूचना से पहले बड़े फैसले लेने की तैयारी में है. (File Photo)

Lucknow News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार (Yogi Government) पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले प्रदेश में कई बड़े फैसले लेने की तैयारी में है. इनमें वाराणसी और कानपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने के प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है.

लखनऊ. उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव (UP Panchayat Chunav) की अधिसूचना (Notification) 27 मार्च को लग सकती है. चर्चा है कि 12, 15, 19 और 22 अप्रैल को पंचायत चुनाव हो सकते हैं. उच्च पदस्थ सूत्रों के अनार इसी को देखते हुए सरकार कई बड़े निर्णय लेने की तैयारी में है. माना जा रहा है कि एक तरफ आईपीएस अधिकारियों की तबादला लिस्ट आने की उम्मीद है. वहीं कानपुर, वाराणसी को पुलिस कमिश्नरेट बनाने का प्रस्ताव भी शासन पहुंच गया है.

पता चला है कि गाजियाबाद में डीआईजी/एसएसपी की तैनाती की जाएगी. वहीं नोएडा पुलिस कमिश्नरेट में भी बदलाव की चर्चा है. बताया जा रहा है कि आकाश कुलहरि, शलभ माथुर दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं.  सूत्रों के अनुसार आज की कैबिनेट बैठक अति महत्वपूर्ण है. आज कानपुर, वाराणसी में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी जा सकती है.

टल सकती हैं बोर्ड परीक्षाएं

बता दें सरकार ने 30 अप्रैल तक पंचायत चुनाव कराने के लिए खाका तैयार कर लिया है. इसी क्रम में माना जा रहा है कि बोर्ड परीक्षाएं भी टल सकती हैं. आयोग की तरफ से सीएम योगी से इस संबंध में बोर्ड परीक्षाएं थोड़ा आगे बढ़ाने की गुजारिश भी की जा चुकी है. दरअसल हाईकोर्ट ने आयोग को चारों पदों के लए चुनाव 10 मई तक संपन्न करवाने के आदेश दिए हैं. 30 अप्रैल को मतदान होने के बाद माना जा रहा है कि मई के पहले हफ्ते तक मतगणना पूरी कर ली जाएगी.सुप्रीम कोर्ट में कल अहम सुनवाई

वहीं दूसरी तरफ  सुप्रीम कोर्ट में यूपी पंचायत चुनाव में आरक्षण को लेकर दाखिल 186 पन्ने की याचिका पर 26 मार्च को सुनवाई होनी है. याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने आरक्षण को लेकर जो आदेश दिया है उसे बदला जाये. याचिकाकर्ता ने मांग की है कि 1995 को ही आधार वर्ष मानकर इस चुनाव के लिए सीटों का आरक्षण किया जाये. उन्होंने कहा है कि सरकार ने फरवरी में ऐसा ही करने का शासनादेश जारी किया था. आरक्षण हो भी गया था, लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया और 2015 को आधार वर्ष मानकर सरकार को नये सिरे से आरक्षण के आदेश दे दिये.8

नहीं होगी चुनाव में देरी

अब सुप्रीम कोर्ट में जो भी फैसला आये उससे राज्य सरकार के सामने किसी भी तरह का संकट खड़ा नहीं होगा. आधार वर्ष को लेकर सुप्रीम कोर्ट के किसी भी फैसले से चुनाव में और विलम्ब होने की संभावना नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार के पास दोनों ही लिस्ट मौजूद हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से पहले आरक्षण की जो लिस्ट बनाई गयी थी, उसे 1995 को आधार वर्ष मानकर तैयार किया गया था. हाईकोर्ट के फैसले के बाद जो लिस्ट तैयार की गयी है उसे 2015 को आधार वर्ष मानकर तैयार कराया गया है. ऐसे में राज्य सरकार के पास दोनों ही लिस्ट मौजूद है. अब उसे अलग से लिस्ट तैयार करने के लिए और समय नहीं चाहिए जैसा कि हाईकोर्ट के ऑर्डर के बाद दिया गया था. जाहिर है कि आधार वर्ष को लेकर सुप्रीम कोर्ट का चाहे जो फैसला हो, चुनाव में विलम्ब नहीं होगा.

इनपुट: अजीत सिह







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