…तो क्या एक फकीर के कारण हुई थी 10 मई 1857 की क्रांति!


मेरठ. 10 मई 1857 वो तारीख है जिसपर हर हिंदुस्तानी फक्र करता है क्योंकि इस दिन अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका गया था. अब 10 मई 2022 आऩे वाला है. इस बार क्रांति की 165 वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं. ऐसे में आज हम आपको ऐसे साधु की कहानी बताएंगे जिनका जिक्र इतिहास में मिलता है. मेरठ के राजकीय संग्रहालय में 1857 की क्रांति का जिक्र करते हुए एक साधु को भी याद किया गया. संग्रहालय में बाकयदा फोटो के साथ ये लिखा गया है कि अप्रैल 1857 में एक साधु आए थे. इस कमिंग ऑफ फकीर का नाम दिया गया. लिखा गया है कि साधु का आना और फिर 10 मई को बगावत हो जाना ये महज एक संयोग नहीं है. बल्कि इसके पीछे एक कुशल रणनीति है. बताया जाता है कि ये साधु भी क्रांतिकारियों के साथ 10 मई 1857 को मौजूद थे. हालांकि साधु के नाम का जिक्र नहीं किया गया है. संग्रहालय अध्यक्ष पी मौर्या ने कहा कि इतिहास में इसे कमिंग ऑफ द फकीर का नाम दिया गया था.

क्रांतिवीरों को नमन
ऐसे क्रांतिवीरों को धरती मेरठ में इस बार शानदार तरीके से क्रांतिवीरों को नमन किया जा रहा है. क्रांति के उदगम स्थल मेरठ से आगामी सात मई को 165 लोगों की टीम दिल्ली तक पदयात्रा के लिए रवाना होगी. 165 लोगों की ये टीम उन सभी स्थानों पर जाएगी जहां-जहां क्रांतिवीरों की गाथा का वर्णन इतिहास में है. मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर विघ्नेश त्यागी ने बताया कि क्रांति कि उदगम स्थल के साथ जहां जहां क्रांतिवीरों ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद किया था. उन सभी जगहों पर टीम पैदल मार्च करेगी. मेरठ के औघड़नाथ मंदिर से इस यात्रा की शुरुआत होगी. जहां क्रांति का उदगम स्थल माना जाता है. वहीं मेरठ के विक्टोरिया पार्क सहित मोहिउद्दीनपुर गाजियाबाद और दिल्ली के लालकिले तक इतिहासकारों की टीम पहुंचेगी. दिल्ली के लालकिले पर इस यात्रा का समापन होगा. आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत इस बार भव्य तरीके से क्रांति दिवस मनाया जाएगा.

भारतीय इतिहास में 1857 की क्रांति का बहुत महत्व है. इस क्रांति ने देश में दूरगामी बदलावों की नींव रखी थी. ये क्रांति अचानक ही नहीं हुई ये धीरे-धीरे तपी और फैली. इस दौरान 10 मई 1857 का दिन इस क्रांति के लिए एक बड़ा दिन साबित हुआ. 1857 में 10 मई को ही मेरठ की छावनी में 85 जवानों ने मिल कर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था और इसे क्रांति का पहला कदम और आदाजी के लिए फूटी पहली चिंगारी माना जाता है.

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FIRST PUBLISHED : May 06, 2022, 19:15 IST



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