Shardiya Navratra: रहस्यों से भरी है जालौन देवी मंदिर की महिमा, चंबल के डाकू भी झुकाते थे सिर


हाइलाइट्स

चंबल के बीहड़ में स्थित है जालौन माता का मंदिर
देश-विदेश से दर्शन के लिए आते हैं लोग
पांडवों ने करवाया था मंदिर का निर्माण

रिपोर्ट- नीलू सिंह

जालौन. डकैतों पर बनी कई ऐसी फिल्में, जिसमें आपने देखा होगा कि डकैत मंदिरों में जाकर शक्ति की पूजा यानी देवी मां की आराधना करते हैं. चंबल के बीहड़ डकैतों का गढ़ माने जाते थे. बॉलीवुड की कई फिल्में जैसे ‘जिस देश में गंगा बहती है’, मेरा गांव मेरा देश, डकैत, मुझे जीने दो आदि को चंबल के बीहड़ों में शूट किया गया. चंबल के इन्हीं बिहड़ो में स्थित है मां जालौन देवी का धाम, जिन्हें जयंती देवी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. इस मंदिर के कई रहस्य और महिमाएं हैं. आइए आपको इसके चमत्कार बताते हैं.

पांडवों के हाथों किया गया था इस मंदिर का निर्माण
कहते हैं महाभारत काल में पांडव जब अपने अज्ञातवास में थे, तो उन्होंने इस मंदिर का निर्माण कराया था. पांडवों ने माता कुंती के कहने पर वेदव्यास को कालपी से बुलाकर रातों-रात मंदिर का निर्माण करवाया था. कहते हैं कि आज भी ब्रह्म मुहूर्त में ॠषि-मुनि, यमुना और चंबल नदी के संगम में स्नान कर माता की पूजा करते हैं. इस मंदिर के पुजारी का कहना है कि जब वह सुबह माता के पट को खोलते हैं, तो माता के सामने जल पुष्प अक्षत पहले से चढ़ाए मिलते हैं.

संतान सुख देने वाली माता
चंदेल राजाओं के समय इस मंदिर की काफी ख्याति थी. लोग, दूर-दराज से यहां पर पहुंचते थे. एक बार एक भक्त अपने मरे हुए बच्चे को लेकर माता के धाम पहुंचा. कहते हैं कि मां की पूजा और दर्शन मात्र से उस बच्चे के प्राण लौट आए. बालक जीवित हो गया. जिसके बाद से ही माता को संतान देने वाली माता भी कहा जाने लगा. तब से लोग संतान कामना के साथ इस मंदिर में पहुंचते हैं.

बिहड़ो के डकैत भी झुकाते थे सर
एक समय था जब चंबल में डाकुओं का राज हुआ करता था. बड़े-बड़े डकैतों का चंबल में आतंक था. जिसमें फूलन देवी, निर्भय गुज्जर, सीमा परिहार, कुसमा नाइन, फक्कड़ बाबा सरीखे डकैत शामिल थे. जयंती देवी मंदिर के पंडित बताते हैं कि जिन्होंने भी चंबल के बीहड़ों पर राज किया वह सभी माता के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचते थे. चोरी छुपे यहां पहुंचकर माता की पूजा अर्चना करते, घंटा चढ़ाते और फिर यहां से निकल जाते थे.

धाम में लगता है विशाल मेला
चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र में यहां वृहद मेले का आयोजन किया जाता है. कहते हैं इस 9 दिन दूरदराज के जनपदों से तो लोग आते ही हैं, साथ ही देश विदेश के लोग भी यहां पर मां की पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं. करीब 10 किलोमीटर के दायरे में जाम की स्थिति हो जाती है. गाड़ियों की लंबी लंबी कतारें, लोगों का रेला, यहां पर देखने को मिलता है. सब एक बार माता की झलक पाना चाहते हैं और अपनी मनोकामना पूर्ण करना चाहते हैं. नवरात्रि के मौके पर यहां जबरदस्त रौनक रहती है. कहीं भंडारे होते हैं, कहीं जागरण का कार्यक्रम रखा जाता है. लोग अपने पूरे परिवार के साथ मां से आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं. कहते हैं कि एक बार अगर आप मां के दर्शन कर ले तो आप दोबारा इस धाम में जरूर आएंगे.

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