संगमनगरी में जानिए क्यों ‘हथौड़ा’ को बनाया जाता है दूल्हा और बड़े भौकाल के साथ निकलती है उसकी बारात 


Prayagraj:-होली के दिन दिल खिल जाते हैं
रंगों में रंग मिल जाते हैं
गिले-शिकवे भूलकर दोस्तों
दुश्मन भी गले मिल जाते हैं.
रंगों का यह त्योहार कुछ ऐसा ही है जब हम दुश्मनी,द्वेष ईर्ष्या छोड़कर प्यार, हंसी ,स्नेह, भाईचारा,सद्भावना की बात करते हैं.राग और रंग का यह त्योहार पूरे भारत में अपने-अपने अंदाज से मनाया जाता है.हर तरफ होली की मौज,होलियारों की मस्ती,एक-दूसरे पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी,समाज का हर वर्ग सिर्फ और सिर्फ होली के रंग में डूबा मिलता है.अगर बात करें आपके अपने शहर प्रयागराज की तो यहां होली की मौज कुछ अलग ही अंदाज में नजर आती है.तीन दिन तक रंगों का यह त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, इसके साथ ही साथ होली में यहां सदियों से कुछ अनोखी परंपराएं भी निभाई जा रही हैं जिनका अस्तित्व आज तक बरकरार है.यह अनोखी और प्राचीन परंपराएं प्रयागराज में होली को और रंगीन बनाती हैं.जिनमें से हथौड़ा बारात प्रमुख रूप से शामिल है.होली पर हथौड़ा बारात की परंपरा सिर्फ और सिर्फ प्रयागराज में ही आपको मिलेगी.तो चलिए जानते हैं इस खास परंपरा को मनाने का तरीका और उसके पीछे छिपे कारण को-

आखिर क्या है प्रयागराज की हथौड़ा बारात
प्रयागराज में सदियों से मनाई जाने वाली हथौड़ा बारात वह परंपरा है जब हथौड़े को बाकायदा दूल्हा बनाकर उसकी बड़े भौकाल के साथ उसकी बारात निकाली जाती है.जी हां… हथौड़ा को दूल्हे की तरह फूल माला से सजाया जाता है और नाचते गाते उसकी बारात निकलती है.इस बारात में प्रयागवासी सिर पर पगड़ी बांधे नाचते हुए नजर आते हैं.यह बारात होलिका दहन से पहले प्रयागराज के अलग-अलग हिस्सों में निकाली जाती है.जो भी व्यक्ति इसे पहली बार देखता है वह हैरान रह जाता है.एक भारी-भरकम हथौड़े को दूल्हे की तरह सजाकर, उसके पीछे चलने वाले लोगों का सज-धज कर,गाजे-बाजे के साथ नाचना,सामान्य बात नहीं लेकिन ऐसा प्रयागराज की धरती में सदियों से होता आ रहा है.संक्षेप में कहें तो एक नवयुवक की जैसे पूरे रीति-रिवाज के साथ बारात निकाली जाती है, ठीक वैसे ही प्रयागराज में हथौड़ां की बारात होलिका दहन से पूर्व निकाली जाती है और इसी के बाद से शहर में होली का शुभारंभ होता है.

क्यों मनाते हैं सदियों से हथौड़ा बारात
एक लंबे समय तक हथौड़ा बारात का संचालन करने वाली संस्था अमृत कलश के संचालक बाबा अभय अवस्थी बताते हैं कि प्रयागराज में हथौड़ा पूजनीय है इसलिए हम बारात में हथौड़े को दूल्हा बनाते हैं.इसकी वजह बताते हुए वह कहते हैं कि प्रलय आने के बाद सृष्टि का पुनर्निर्माण प्रयागराज के पवित्र अक्षयवट से हुआ.यहीं पर से भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी का आह्वाहन किया,भगवान ब्रह्मा ने प्रयाग की पावन धरती पर यज्ञ किया और सृष्टि के निर्माण के लिए विश्वकर्मा का आवाहन किया.विश्वकर्मा ने उस समय जो सबसे पहला यंत्र या औजार बनाया वह हथौड़ा ही था.हथौड़ा बारात की इस पौराणिक मान्यता के चलते ही प्रयागवासी एक लंबे अरसे से यहां हथौड़ा बारात निकालकर होली का शुभारंभ करते हैं.

(प्रयागराज से प्राची शर्मा की रिपोर्ट)

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