पुलिस दबिश के दौरान जहर खाने वाली मां और बेटियों की मौत, दारोगा निलंबित


बागपत/लखनऊ. उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के छपरौली क्षेत्र के बाछौड़ गांव में पुलिस दबिश के दौरान जहर खाने वाली मां और दो बेटियों की मौत के मामले में नामजद आरोपी दारोगा को निलंबित कर दिया गया है. पुलिस ने इसकी जानकारी दी. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी करके चार हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है.

बागपत के पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार जादौन ने शुक्रवार को बताया कि जांच में यह तथ्य सामने आया है कि दबिश के दौरान दारोगा नरेश पाल की मौजूदगी में ही मां और बेटियों ने जहर खाया था. उस वक्त दारोगा ने सूझबूझ का परिचय देने के बजाय लापरवाही बरती, इसके मद्देनजर उसे आज निलंबित कर दिया गया.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी करके चार हफ्ते के अंदर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. रिपोर्ट में मामले की जांच की स्थिति और अगर पीड़ित परिवार को कोई सहायता दी गई है तो उसके बारे में विस्तार से जानकारी देनी होगी. आयोग ने नोटिस जारी करते हुए माना कि मामले की मीडिया रिपोर्टों पर गौर करने से ऐसा लगता है कि कानून लागू कराने वाली एजेंसियां हालात को विवेकपूर्ण तरीके से सम्भालने में विफल रहीं, जिसकी वजह से मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ.

इसके पूर्व, जहर खाने के बाद गम्भीर रूप से बीमार हालत में मेरठ के अस्पताल में इलाज के दौरान मृत महिला अनुराधा (47) और उसकी छोटी बेटी प्रीति (17) का शव पोस्टमार्टम के बाद गांव में लाया गया तो महिलाओं ने सड़क पर ही एंबुलेंस रोक ली और धरने पर बैठ गईं. बाद में वरिष्ठ अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को उचित मदद करने का आश्वासन दिया. उसके बाद शवों का अंतिम संस्कार किया गया.
गौरतलब है कि पिछली तीन मई को छपरौली थाना क्षेत्र के बाछौड़ गांव निवासी कान्ति नामक व्यक्ति ने पुलिस को तहरीर दी थी कि उसकी पुत्री को गांव का ही युवक प्रिन्स लेकर फरार हो गया है. इस मामले में मंगलवार की रात पुलिस की दबिश के दौरान अभियुक्त की मां अनुराधा और दो बहनों स्वाति तथा प्रीति ने जहर खा लिया था. तीनों को मेरठ के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां बुधवार को स्वाति की जबकि बृहस्पतिवार को अनुराधा और प्रीति की मौत हो गई.

अनुराधा के पति महक सिंह ने कहा कि उसका बेटा प्रिंस यदि किसी युवती को लेकर चला गया तो बेटे के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन पुलिस ने परिवार के सभी सदस्यों को परेशान करना शुरू कर दिया. उन्होंने बताया कि पुलिस कई बार उनके घर आई और परेशान किया, आए दिन पुलिस उसके परिवार के सदस्यों को थाने ले जाकर मारपीट करती थी.

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