Positive Story: ये हैं गाज़ियाबाद के डेंगू मैन, ढाई लाख को मुफ्त दे चुके डोज़, जानें क्या है यह दवा और मिशन


रिपोर्ट. विशाल झा

गाजियाबाद. मौसम में बदलाव के साथ-साथ कई संक्रमण पांव पसारने लगे हैं. सितंबर के महीने में इस बार डेंगू के नए वैरिएंट के फैलने से भारत में काफी तेज़ी से केस बढ़ रहे हैं. डेंगू हमेशा से चिंता का विषय इसलिए भी रहा है क्योंकि इसका इलाज लंबा और खर्चीला होता है. कुछ मामलों में तो यह जानलेवा भी साबित हुआ है. इस बीमारी के प्रति जागरूक होने को अहम माना जाता है. गाज़ियाबाद में एक बुज़ुर्ग को इन दिनों डेंगू मैन इसलिए कहा जाने लगा है क्योंकि न केवल वह लोगों को इस रोग के बारे में जागरूक कर रहे हैं बल्कि दवा भी मुफ्त में पिलाते हैं.

दरअसल डेंगू का संक्रमण एक खास किस्म के मच्छर के काटने से होता है. मादा एडेस एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलने वाले डेंगू से बचने के लिए आप को मज़बूत रोग प्रतिरोधक क्षमता की ज़रूरत होती है. डेंगू का मच्छर आमतौर पर घुटनेया उसके नीचे ही काटता है इसलिए सलाह दी जाती है फुल पैंट जैसे कपड़े पहनकर रहें. डेंगू कि लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. इस बीमारी के खतरनाक होने के बावजूद लोगों में जागरूकता कम है. ऐसे में गाज़ियाबाद निवासी 58 साल के सतीश बिंदल लोगों को खबरदार कर रहे हैं.

मुफ्त में पिलाते हैं दवा, क्या आप चाहेंगे?

बिंदल कहते हैं कि डेंगू के लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए. प्लेटलेट्स कम होने की समस्या खरतनाक होती है. दरअसल सतीश खुद डेंगू के शिकार हो चुके हैं इसलिए इस बीमारी के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. वह लोगों को मुफ्त में डेंगू की दवा पिलाते हैं. बह बताते हैं कि अब तक करीब ढाई लाख से ज्यादा लोगों को वह डेंगू की दवा पिला चुके हैं. न केवल गाज़ियाबाद बल्कि देश के अलग-अलग प्रदेशों में और यूपी के मेरठ, बागपत जैसे ज़िलों में भी वह यह अभियान चला चुके हैं.

अगर आप दवा पिलाने के अभियान के लिए बिंदल से सपंर्क करना चाहते हैं तो उन्हें मोबाइल नंबर 99113 01764 पर काॅल या मैसेज कर सकते हैं.

आखिर क्या है डेंगू की यह दवा?

बिंदल को लोग डेंगू मैन के नाम से पुकारने लगे हैं. वह बताते हैं कि उनकी दवा इम्यूनिटी सिस्टम को मज़बूत करती है. इस दवा से मरीज़ को जल्दी रिकवर करने में मदद मिलती है. यह एक होम्योपैथिक दवा है. गोद के छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को छोड़कर यह दवा सभी पी सकते हैं. बिंदल ने यह भी बताया कि स्कूली बच्चों को भी अभियान में जोड़ते हैं. अगर संख्या एक-डेढ़ हज़ार तक हो तो अपने खर्चे पर ही दवा पिलाते हैं, अन्यथा संस्था से मदद लेते हैं.

Tags: Dengue, Ghaziabad News



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