पीलीभीत टाइगर रिजर्व में खुश हैं जानवर, तेंदुआ समेत कई प्रजातियों में तीन गुना बढ़ी संख्या

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हाइलाइट्स

वर्ष 2019 के बाद वनस्पति आहारी वन्यजीव गणना 2022 हुई संपन्न.
हर तीन साल में होती है गणना, तीन गुना से ज्यादा बड़ा 3 साल में वन जीवन.

पीलीभीत. उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 9 मई वर्ष 2022 से 29 मई वर्ष 2022 तक प्रधान मुख्य वन संरक्षक उत्तर प्रदेश निर्देश पर वनस्पति आहारी वन्यजीव गणना आरंभ की गई थी. इस बार गणना खास रही क्योंकि पिछले तीन वर्षों में वन्य जीव कि संख्या तीन गुना तक बढ़ गई है. यह गणना 3 वर्षों में एक बार वन विभाग द्वारा कराई जाती है. प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व एवं समाजिक वानिकी प्रभाग सम्मिलित किए जाते हैं.

पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभारी वन अधिकारी नवीन खंडेलवाल के नेतृत्व में यह गणना की गई. टीम थ्री की निगरानी बिल्ली प्रजाति सहित वनस्पति आहारी वन्यजीव काफी बढ़ोतरी हुई है. गुलदार, तेंदुए में तीन गुना जबकि जंगली सूअर और चीतल प्रजाति में छह गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

कर्मचारियों का मानदेय अटका

वहीं, दूसरी तरफ आने वाला समय पीलीभीत टाइगर रिजर्व के वन जीवन के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है. पिछले दिनों बजट के अभाव के कारण लगभग सौ से ज्यादा दैनिक वेतन कर्मचारियों को हटा दिया गया है और जो दैनिक श्रमिक कर्मचारी काम कर रहे हैं, उनका लगभग 9 माह से 12 माह तक का मानदेय अभी तक नहीं मिला है. ऐसे में जब वन जीवन के रक्षकों को ना कोई सरकारी सुविधा और ना ही वेतन मिलेगा तो उसका सीधा असर वन्य जीवन पर पड़ेगा.

गुलदार तेंदुए में तीन गुना जबकि जंगली सूअर और चीतल प्रजाति में छह गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

भविष्य में बढ़ सकती हैं मुश्किलें

भले ही पीलीभीत टाइगर रिजर्व को कई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल चुके हों लेकिन दैनिक श्रमिक कर्मचारी एवं वन विभाग के सरकारी कर्मचारियों की दशा और दिशा दोनों बिगड़ चुकी है. सरकार सहित वन विभाग से जुड़ी संस्थाएं बिल्कुल भी पीलीभीत टाइगर रिजर्व पर ध्यान नहीं दे रही हैं, जिसका परिणाम आने वाले समय में घातक साबित हो सकता है.

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