मुहर्रम 2022ः हरदोई के बावन कस्बे के कृष्ण मुरारी का घर है मिसाल, जानें क्यों?


हाइलाइट्स

आंगन में कृष्ण की मुरली के साथ-साथ सदाएं-हुसैन गूंजती है.
कृष्ण मुरारी की मन्नत पूरी होने पर शुरू हुआ मुहर्रम मनाने का सिलसिला.

हरदोई. वर्तमान में अपनापन कम देखने को मिलता है. लोग अक्सर फिजूल विवादों में उलझे रहते हैं. लेकिन कुछ ऐसे उदहारण हैं जो आज के दौर में भी बताते हैं कि प्रेम की भावना सबसे पहले है. उत्तर प्रदेश के बावन कस्बे के कृष्ण मुरारी कश्यप कई सालों से प्रेम और भाईचारे की एक मिसाल पेश कर रहे हैं. भले ही कितने ही तनाव हो जाएं, इनके आंगन में कृष्ण की मुरली के साथ-साथ सदाएं-हुसैन गूंजती है.

बावन कस्बे के कृष्ण मुरारी कश्यप अब इस पूरे क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन चुके हैं. जहां एक तरफ लोग मजहब और जाति के नाम पर लड़ते-झगड़ते हैं. वहीं, दूसरी तरफ इन सब बातों से इतर कृष्ण मुरारी कश्यप पिछले कुछ सालों से अपने आंगन में ताजियादारी कर रहे हैं. हर कोई यही कहता है कि आपसी मोहब्बत और भाईचारा देखना हो तो बावन कस्बे के कृष्ण मुरारी को देख लो. उनके आंगन में हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे की झलक दिखाई देती है.

बेटी के लिए मांगी थी मन्नत
कृष्ण मुरारी कश्यप पिछले 3 सालों से मुहर्रम पर अपने घर में हजरत इमाम हुसैन की याद में ताजियादारी कर रहे हैं. इस काम में अकेले कृष्ण मुरारी ही नहीं बल्कि उनके सभी घर वाले शामिल रहते हैं. आखिर कृष्ण मुरारी कश्यप ताजियादारी क्यो करते हैं? इसकी दिलचस्प वजह है. तीन साल पहले कृष्णमुरारी ने मन्नत मांगी थी कि इज्जत के साथ उनकी बिटिया रानी के हाथ पीले हो जाएं. मन्नत पूरी हुई और बिटिया की शादी हो गई. उसके बाद से उन्होंने ताजियादारी शुरू कर दी.

सोशल मीडिया पर वायरल फोटोज
उसके बाद उन्होंने अपने बेटे के आंगन में किलकारियां सुनने की मन्नत मांगी, वह भी पूरी हो गई. बस, तभी से कृष्ण मुरारी के यहां ताजियादारी शुरू हो गई. हर साल मोहर्रम में उनके यहां ताजिया रखा जाता है. हर मजहब ओ मिल्लत के लोग उनके यहां जियारत करने पहुंचते हैं. कृष्ण मुरारी ने काफी खूबसूरत तरीके से सजावट की है, जिसकी फोटो इन दिनों सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है.

Tags: Hardoi News, Muharram



Source link

more recommended stories