मथुरा: राधा रानी मंदिर में टूटेगी 5000 साल पुरानी परंपरा, इलाहाबाद हाईकोर्ट से सेवादार विवाद में नहीं मिली राहत


हाइलाइट्स

इस बार रविवार 4 सितंबर को राधा अष्टमी का पर्व है
5000 साल में पहली बार कोई महिला सेवादार कराएंगी पूजा

प्रयागराज. मथुरा के विश्व प्रसिद्ध राधा रानी मंदिर में 4 सितंबर को राधा अष्टमी के मौके पर पहली बार 5000 साल पुरानी परंपरा टूटने जा रही हैं. राधा अष्टमी के मौके पर गोस्वामी समाज का पुरुष पुजारी यानी सेवादार मंदिर में पूजा नहीं करायेगा, बल्कि मंदिर में एक महिला पुजारी को पूजा कराने का अधिकार मिलेगा. विश्व प्रसिद्ध राधा रानी मंदिर के पुजारी को लेकर हुए विवाद के मामले में दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट मेंं शनिवार को छुट्टी के दिन इस मामले में सुनवाई की. लेकिन अदालत ने फौरी तौर पर कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने रास बिहारी गोस्वामी की याचिका पर विपक्षी माया देवी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. हाईकोर्ट ने याचिका 12 सितंबर को सुनवाई के लिए पेश करने का निर्देश दिया है.

गौरतलब है कि राधाष्टमी पर मंदिर में बड़ा आयोजन होता है. इस बार रविवार 4 सितंबर को राधा अष्टमी का पर्व है. इस मौके पर यहां लगने वाले मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. मथुरा के बरसाने में राधा रानी का यह मंदिर स्थित है. इस मंदिर को ठाकुर श्री लाडली जी महाराज मंदिर के नाम से जाना जाता है. यह मंदिर 5000 साल पुराना बताया जाता है. ऐसा कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण के पौत्र राजा बज्रनाथ ने इस मंदिर का निर्माण कराया था. मंदिर की देखभाल तीन सेवायत बाबा थोक, लक्ष्मण थोक व अक्षय राम थोक बारी-बारी एक साल के अंतराल पर करते हैं. ये गोस्वामी ब्राह्मण है. बांके बिहारी मंदिर के बाद मथुरा में धार्मिक महत्व का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण मंदिर इसे माना जाता है. मंदिर की परंपरा में गोस्वामी समाज के पुरुषों को ही यहां का सेवादार यानी पुजारी बनने का अवसर दिया जाता है. सेवादार को ही पूजा अर्चना कराने का अधिकार होता है. मंदिर के सेवादार के पद पर परंपरा के मुताबिक एक परिवार के लोगों को ही मौका मिलता रहा है. तीन टुकड़ों में बंटे परिवार को एक-एक साल के लिए पुजारी यानी सेवादार नियुक्त किया जाता है. एक साल के कार्यकाल में परिवार के कई सदस्यों को काम करने का मौका मिलता है. इसके लिए परिवार के सदस्यों ने आपस में नियम तय किया हुआ है. नियम के मुताबिक इसी साल 27 अप्रैल से 20 अक्टूबर तक के लिए हरबंस लाल गोस्वामी को सेवादार के पद पर काम करना था. हालांकि हरबंस लाल की मृत्यु 1999 में ही हो चुकी थी. इस नाते इस अवधि में उनके भाई के पौत्र रासबिहारी को सेवादार नियुक्त होना था. परिवार में रासबहारी की नियुक्ति को लेकर कोई विवाद नहीं था. रासबिहारी ने तय वक्त पर अपना कार्यभार ग्रहण भी कर लिया था. इस बीच माया देवी नाम की एक महिला ने खुद को हरबंस लाल गोस्वामी की विधवा होने का दावा करते हुए मंदिर का सेवादार बनाए जाने का दावा किया। निचली अदालत के एक आदेश से माया देवी को सेवादार मानते हुए प्रशासन ने उस पद पर काबिज भी करा दिया था.

माया देवी को सेवादार बनाए जाने का है विवाद
हालांकि बाद में छाता सर्किल के सिविल जज जूनियर डिविजन का आदेश जिला अदालत से लेकर हाईकोर्ट तक रद्द हो गया था. हाईकोर्ट ने भी माया देवी की सेवादार पद पर नियुक्ति को सही नहीं माना था. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि वह गलत मंशा के साथ पद पर काबिज हुई और अदालत में अर्जी दाखिल की. परिवार के लोगों की आपत्ति थी कि माया न तो पुरुष है और ना ही गोस्वामी समाज से है. इसलिए उन्हें सेवादार पद पर नियुक्ति दी ही नहीं जा सकती है. परिवार ने माया देवी को हरबंस लाल की पत्नी मानने से भी इनकार किया था और उन पर झूठा दावा करने का आरोप लगाया था. अदालतों से आए फैसलों में माया देवी को हरबंस लाल गोस्वामी की पत्नी भी नहीं माना गया था.

ये है पूरा विवाद
इन्हीं आदेशों के आधार पर रास बिहारी ने छाता सर्किल के सिविल जज जूनियर डिविजन के यहां अर्जी दाखिल की. राधा अष्टमी पर खुद को सेवादार के तौर पर काबिज कराए जाने का आदेश दिए जाने की मांग की थी. छाता के सिविल जज ने फौरन कोई आदेश देने से इनकार करते हुए सुनवाई के लिए 8 सितंबर की तारीख तय कर दी थी. सिविल जज की कोर्ट में शुक्रवार यानी 2 सितंबर को सुनवाई हुई थी. 4 सितंबर को होने वाले राधा अष्टमी के पर्व पर खुद को सेवादार के रूप में मंजूरी दिए जाने की मांग को लेकर रासबिहारी ने शनिवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की. याची अधिवक्ता आशुतोष शर्मा ने मामले को अर्जेंट बताते हुए अदालत से छुट्टी के दिन भी सुनवाई किए जाने की अपील की. जस्टिस विवेक चौधरी की सिंगल बेंच ने शनिवार को छुट्टी के दिन इस मामले में सुनवाई की. हालांकि छुट्टी के दिन सुनवाई के बावजूद कोर्ट ने रासबिहारी को कोई फौरी राहत नहीं दी है. अदालत ने कोई भी अंतरिम आदेश जारी करने से मना कर दिया. अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि राधा अष्टमी की वजह से मंदिर में मेला लगा हुआ है. वहां लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ एक दिन पहले से ही इकट्ठा हो चुकी है. ऐसे में सेवादार बदले जाने का आदेश दिए जाने से कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है. जन्माष्टमी की तरह भगदड़ जैसे हालात हो सकते हैं, जिससे श्रद्धालुओं की जानमाल को खतरा हो सकता है. इसलिए इस मामले में कोई अंतरिम आदेश दिया जाना उचित नहीं होगा. कोर्ट ने विपक्षी महिला माया देवी को नोटिस जारी कर उससे जवाब दाखिल करने को कहा है. अब इस मामले में 12 सितंबर को हाईकोर्ट फिर से सुनवाई करेगी।

आज टूटेगी परंपरा
याचिकाकर्ता की तरफ से उनके वकील आशुतोष शर्मा ने बहस की. हम आपको बता दें कि सेवादार बनने का दावा करने वाले रासबिहारी इससे पहले 27 से 29 अगस्त तक मंदिर परिसर में भूख हड़ताल पर बैठ चुके हैं. तबीयत बिगड़ने पर पुलिस ने उन्हें जबरन हटाया था. फिलहाल अदालत से कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं होने से मथुरा के इस मंदिर की 5000 साल पुरानी परंपरा टूटेगी और राधा अष्टमी के दिन अब महिला सेवादार ही पूजा अर्चना कराएंगी.

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