मथुरा: गोकुल में मौजूद है बाल गोपाल को बांधने वाली ऊखल, जानिए कौन थे यमला व अर्जुन 


रिपोर्ट: चंदन सैनी
मथुरा: भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भले ही मथुरा में हुआ था लेकिन उनका बचपन गोकुल में बीता था. गोकुल में भगवान श्रीकृष्ण ने बहुत सी लीलाएं की हैं. उन्हीं लीलाओं का साक्षी है ऊखल बंधन लीला स्थान. कहा जाता है कि इसी स्थान पर मां यशोदा ने बचपन में भगवान श्रीकृष्ण को ऊखल से बांधा था. आज भी वह ऊखल इस स्थान पर मौजूद है, जिसका दर्शन करने के लिए कृष्ण भक्त दूर-दराज से आते रहते हैं.

पौराणिक मान्यता है कि माता यशोदा ने आग पर दूध उबालने के लिए रखकर भगवान श्रीकृष्ण को दूध पिला रहीं थी. इसी बीच आग पर रखा दूध ऊबाल के साथ गिरने ही वाला था कि माता भगवान श्रीकृष्ण को छोड़कर उस दूध को उतारने के लिए चली गईं. इसे देख बाल स्वरूप कान्हा जी को क्रोध आ गया और वह पास में ही रखी माखन की मटकी को पत्थर से तोड़ कर ऊखल पर बैठकर खाने लगे और बंदरों को भी खिलाने लगे. जब मां यशोदा वापस आईं और यह सब देखकर क्रोधित हो गईं और छड़ी उठाकर कान्हा को डांटना शुरू कर दिया और कृष्ण को ऊखल से बांध दिया.

यमला और अर्जुन का किया उद्धार
पुजारी जी का कहना है कि इसी स्थान पर यमला और अर्जुन के दो वृक्ष हैं, जिनका भगवान श्रीकृष्ण ने उद्धार किया था. यहां भगवान श्रीकृष्ण को दामोदर नाम से भी जाना जाता है. इसीलिए कार्तिक के महीने को दामोदर मास भी कहते हैं. इस महीने में इस स्थान की विशेष पूजा-अर्चना होती है और दीपदान भी किए जाते हैं. दामोदर मास में दीपदान करने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं.

क्यों है गोदान का भी विशेष महत्व?
इस स्थान की ऐसी भी मान्यता है जो लोग अपने घर में कार्तिक महत्तम करते हैं. वो लोग इस स्थान पर आकर दीपदान करते हैं, तो उनका कार्तिक महत्तम पूर्ण हो जाता है. जब भगवान श्री कृष्ण इस स्थान को छोड़कर गए थे, तब अपनी गोकुल की सारी गायों को इसी स्थान पर दान करके गए थे. इस स्थान पर गोदान का भी विशेष महत्व है.

जानिए कहां स्थित है ऊखल बंधन?
यह स्थान मथुरा जंक्शन से करीब 15 किलोमीटर दूर पुरानी गोकुल महावन में स्थित है. जोकि मां यमुना किनारे के पास मौजूद है. इस स्थान पर आप अपने वाहन से यमुना एक्सप्रेस वे और एनएच-2 हाइवे होते हुए भी आ सकते हैं.

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