मोहल्ला कब्र वाला: RTI से हुआ कब्रिस्तान के अंदर बसे 100 परिवारों की बस्ती का खुलासा


हाइलाइट्स

कब्रिस्तान की जमीन पर मोहल्ला बसाने का मामला आगरा का है
प्रशासन ने मामले का खुलासा होने के बाद संज्ञान लिया है
कब्र की जमीन पर बसने वाले लोग दूसरे जगह के बताये जाते हैं

रिपोर्ट- कामिर कुरैशी

आगरा. अक्सर आपने सुना होगा कि माता-पिता  छोटे बच्चों को कब्रिस्तान और श्मशान जाने के लिए मना करते है, क्योंकि वहां पर भूत प्रेत का साया होता है, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे कब्रिस्तान के बारे में बताने जा रहे है, जहां पर माता-पिता के साथ ही छोटे-छोटे बच्चे कब्रों पर खेलते हैं. दिन-रात कब्रों के पास रहते हैं और वहीं सो जाते हैं.

जी हां, सुनने में जरूर अटपटा लगा होगा लेकिन यह सच है. आगरा का शाही कब्रिस्तान कहा जाने वाला शाही पंचकुइया कब्रिस्तान एक ऐसा कब्रिस्तान है जहां पर एक तरफ मुर्दों की कब्रें बनी हुई है तो वहीं दूसरी तरफ जिंदा लोगों के आशियाने. उसी कब्रिस्तान में मुर्दे दफन हैं तो उसी कब्रिस्तान के अंदर लोगों ने अपने कच्चे और पक्के घर बना डाले हैं.

कब्रिस्तान के अंदर रहते हैं लगभग 100 परिवार

दरअसल बीते दिनो आरटीआई एक्टिविस्ट नरेश पारस ने प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की थी कि पंचकुइया कब्रिस्तान के अंदर कुछ लोगों ने अपने घर बना लिए है, और कब्रों की बेकद्री करते हैं. शिकायत के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा कब्रिस्तान पहुंच कर जांच की गई. जांच में पाया कि कब्रिस्तान के अंदर लगभग 100 परिवार रह रहे हैं, जिसकी जानकारी किसी को नहीं है. कब्रिस्तान के अंदर ही इन लोगों के द्वारा पूरी बस्ती बना ली गई है.

हैरान कर देने वाला सच आया सामने

जब आरटीआई ऐक्टिविस्ट नरेश पारस की शिकायत पर प्रशासन की टीम कब्रिस्तान पहुंची तो वहां पर हैरान कर देने वाला सच निकल कर सामने आया. यहां रह रहे अधिकतर लोगों के पास न तो आधार कार्ड है और न ही सरकार द्वारा जारी किया गया कोई भी प्रमाण पत्र. हालांकि जांच कर रही टीम के द्वारा सभी परिवारों को तीन दिन का समय दिया गया है. तीन दिन के अंदर सभी लोग अपने दस्तावेज उपलब्ध कराए. जिसके पास दस्तावेज नहीं है, उनके खिलाफ प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा एक्शन लिया जाएगा.

प्रशासन ने नोटिस किए चस्पा
आरटीआई एक्टिविस्ट नरेश पारस का कहना है कि हमें जानकारी मिली थी कि कुछ लोगों ने कब्रिस्तान में कब्जा कर रखा है, और कच्चे व पक्के घर बनवा लिए है. जानकारी मिलने पर मेरे द्वारा प्रशासन से शिकायत की गई थी, जिसके बाद प्रशासन ने कब्रिस्तान में रह रहे सभी लोगों से उनके आधार कार्ड और घर के कागजात मांगे थे, लेकिन कुछ लोगो के द्वारा यह उपलब्ध नहीं कराया गया है. इन लोगों के घरों पर प्रशासन के द्वारा नोटिस भी चस्पा कर दिए हैं.

हमारे घर हमारी जगह में बने

कब्रिस्तान के अंदर रहने वाले बबरुआ का कहना है कि हमारी उम्र इस समय 70 साल से ज्यादा हो गई है. हमारे बड़े लोग यहीं पर रहते आए हैं. हमारा बचपन भी यहीं बीता है, और हम यहां रहते हैं. हम लोग कब्र खोदने का काम करते हैं. यहां पर जितने भी लोग रहते हैं वो सभी कब्र खोदने का काम करते हैं. हमारे पक्के मकान यहां पर बने हुए हैं. हमारा घर जिस जगह पर बना हुआ है, वह जगह हमारी है, कब्रिस्तान की नहीं है. इस मामले में कब्रिस्तान कमेटी कहती है कि यह जगह कब्रिस्तान की है. इस जगह के हमारे पास कागजात है.

झूठा मालिकाना हक जता रहे

शाही पंचकुइयां कब्रिस्तान कमेटी के सचिव मोहम्मद जहीरुद्दीन बाबर सैफी का कहना है कि पुराने जमाने में कुछ लोगों को कब्र खोदने के लिए रखा गया था. वह लोग कब्रिस्तान में ही रहते थे सिर्फ इसलिए रहने की इजाजत दी गई थी, कि कभी कब्रिस्तान के कब्रे खोदने के लिए परेशानी न हो लेकिन उसके बाद इनके पूर्वजों ने झूठे दस्तावेज के आधार पर खतौनी पर कब्रिस्तान की जगह अपने नाम चढ़ा ली थी. इन लोगों का कब्रिस्तान कमेटी से मुकदमा भी चला था. जो कि यह लोग हार गए थे, उसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा रिपोर्ट तैयार की गई थी, रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि जिस जगह पर यह घर बने है, यह जगह वक्फ की है. यह सभी लोग पूरी तरह से अवैध तरीके से रह रहे हैं.

जो लोग कब्रिस्तान में रह रहे, वह आसपास के शहरों के

प्रशासनिक अधिकार एसीएम पंचम का कहना है कि इस मामले की व्यापक रूप से जांच की जा रही है. कई लोग कब्रिस्तान के अंदर झुग्गी झोपड़ी बना कर रह रहे हैं और कई लोगों के द्वारा पक्के मकान बना लिए हैं. जो लोग रह रहे हैं, वह आगरा के नहीं हैं. उनके आधार कार्ड नजदीकी जनपदों के बने हुए हैं. यह लोग कहां से आए है, और कब्रिस्तान के कैसे रह रहे है, इसकी भी व्यापक रूप से जांच की जा रही है.

Tags: Agra news, UP news



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