MIRZAPUR: प्राचीन शिव मंदिर का रहस्य, भगवान राम से जुड़ी है कहानी


मंगला तिवारी/मिर्जापुर. मिर्जापुर जिले में विंध्य क्षेत्र अपने महात्म के लिए सुविख्यात है. देश के कोने-कोने से वर्ष के दोनों नवरात्र में यहां लाखों श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ता है. यहां आस्था एवं विश्वास का जन- सैलाब देखने को मिलता है. विंध्य पहाड़ी पर स्थित आदि गंगा के पावन तट से लगा हुआ विंध्य क्षेत्र ऐतिहासिक दृष्टिकोण से परिपूर्ण होने के साथ-साथ अपने धार्मिक महत्व को भी अपने अंदर समेटे हुए है. मां विंध्यवासिनी मंदिर, अष्टभुजा माता, काली-खो इत्यादि मंदिरों का तो आपने नाम सुना ही होगा.

विंध्यवासिनी धाम से तकरीबन 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित शिवपुर में रामगया घाट का भी वर्णन है. जहां भगवान श्रीराम ने अपने पिता दशरथ का तर्पण किया था. इसी शिवपुर क्षेत्र में रामगया घाट जाने वाले मार्ग के समीप प्रयागराज-पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल मार्ग से लगा हुआ रामेश्वरम मंदिर भी स्थापित है.

प्रभु श्री राम ने किया था स्थापित
प्राचीन लोक मान्यताओं की मानें तो त्रेतायुग में रामगया घाट पर श्राद्ध करने के पश्चात प्रभु श्री राम ने यहां पर शिवलिंग स्थापित किया था. जिसे कालांतर में रामेश्वरम महादेव के नाम से जाना जाता है. यह मंदिर मुगल आक्रांताओ केविध्वंस का भी शिकार हुआ है. मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर का विध्वंस किया था. जिसके बाद भग्नावशेष पत्थरों से ही पुन: मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया.

उपेक्षित पड़ा है मंदिर
प्रभु श्रीराम द्वारा प्रतिष्ठित विशालकाय शिवलिंग अपनी पौराणिकता को दर्शाता है. विशालकाय पत्थरों से पूर्ण रूप से निर्मित रामेश्वरम मंदिर पूरी तरह से उपेक्षा का शिकार नजर आता है. यदि इसका जीर्णोद्धार कराने के साथ-साथ इस मंदिर को भव्य स्वरूप प्रदान कर दिया जाए तो ना केवल धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से इस स्थल का विकास होगा, बल्कि देश प्रदेश के सैलानियों एवं भक्तों की आस्था का केंद्र अपने बदले हुए स्वरूप में नजर आएगा. इसके अलावा स्थानीय स्तर पर दुकानदारों और रहवासियों को स्वरोजगार के नए अवसर मिलने के साथ ही राजस्व में भी वृद्धि होगी.

पूरी होती हैं सभी मनोकामनाएं
मंदिर के पुजारी गोस्वामी महामृत्युंजय गिरी ने बताया कि शिव जी त्रिकोण के मध्य में स्थित हैं. भगवान शिव के तीनों नेत्र के सामने तीनों महादेवी हैं. पूर्व में महालक्ष्मी, दक्षिण में मां काली और पश्चिम में मां सरस्वती विराजमान हैं. भगवान शिव के दरबार में भक्त जो भी मनोकामना लेकर आते हैं, वो पूर्ण होता है.

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