MIRZAPUR: मिर्जापुर की दो सहेलियों की शानदारी कहानी, पीएम मोदी भी कर चुके हैं तारीफ


रिपोर्ट – मंगला तिवारी

मिर्जापुर: शिक्षा अधिकारों के प्रति जागरूकता के साथ कर्तव्य के प्रति निष्ठा और समर्पण का बोध कराता है. जीवन में बदलाव लाने के लिए शिक्षा सबसे बड़ा माध्यम माना जाता है. यह पंक्तियां चरितार्थ हो रही हैं मिर्जापुर के बरियाघाट पर. जहां दो सहेलियां शिखा मिश्रा और पूर्णिमा सिंह, शिक्षा का दीप जलाकर समाज के लिए एक मिसाल पेश कर रही हैं. दोनों सहेलियां बच्चों को न सिर्फ निःशुल्क ट्यूशन दे रही हैं बल्कि उन्हें तमाम संसाधन भी मुहैया करा रही हैं.

पूर्णिमा सिंह और शिखा मिश्रा नगर के बरियाघाट पर छोटे बच्चों को न सिर्फ निःशुल्क पढ़ाने का काम कर रही हैं. बल्कि उन्हें कॉपी पेंसिल जैसे तमाम संसाधन भी मुहैया करा रही हैं. यहां हर दिन दो घंटे की चलने वाली क्लास में दर्जनों बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं. उन्नति केशरवानी ने बताया कि दीदी अच्छी तरह से समझा कर हमें पढ़ाती हैं. हमें पढ़ाई करना बहुत अच्छा लगता है.

बच्चों के लिए झोली में पुस्तकालय
पूर्णिमा और शिखा गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने के साथ ही एक पुस्तकालय भी चलाती हैं. जिसकी सराहना प्रधानमंत्री मोदी भी कर चुके हैं. दोनों सहेलियां बच्चों की मांग के अनुसार नियमित किताबें झोले में भरकर लाती हैं और पढ़ने के लिए देती हैं.

शुरू में करना पड़ा मुश्किलों का सामना
कहते हैं दुनिया में ऐसा कोई नहीं है जिसने मुश्किलों का सामना नहीं किया हो. आगे बढ़ने के रास्ते पर बाधाएं होती हैं. पूर्णिमा और शिखा ने भी जब बच्चों को शहर के बरियाघाट पर मुफ्त शिक्षा देने का प्रयास किया तो मुश्किलों का सामना करना पड़ा. शिखा मिश्रा ने कहा कि हमने जब पढ़ाना शुरू किया तो परिवार से काफी सपोर्ट मिला. लेकिन आस पड़ोस के लोग कई तरह की बातें करते थे. लेकिन हमें लगता है कि यदि हम समाज में कुछ परिवर्तन चाहते हैं तो बैठकर इंतजार करने की बजाय इसकी शुरुआत हमें करनी पड़ेगी.

आपदा ने बदली सोच
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहीं पूर्णिमा सिंह ने बताया कि हम बाहर के शहरों में पढ़े हैं, वहां के जो घाट हैं वहां लोग पढ़ाई करते थे. लेकिन मिर्जापुर में ऐसा कुछ नहीं था. कोरोना लॉकडाउन में घर आने पर हमने आपदा को अवसर में बदलते हुए बच्चों को पढ़ाने का निर्णय लिया. वहीं, बीएचयू से पीजी और अब एग्जाम्स की प्रिपरेशन कर रहीं शिखा मिश्रा ने बताया कि बनारस या इलाहाबाद की अपेक्षा यहां के घाट का माहौल हमें अच्छा नहीं लगता था. इसलिए हमने निःशुल्क लाइब्रेरी की शुरुआत की. फिर हमने उस समय का सदुपयोग करते हुए बच्चों को मुफ्त में पढ़ाना शुरू कर दिया.

Tags: Mirzapur news, Up news in hindi



Source link