मीडिया चला रहा कंगारू कोर्ट, लांघ रहा न्यायिक पवित्रता की हदें; जानें किस केस में HC ने की यह टिप्पणी


लखनऊ: लखीमपुर खीरी के तिकुनिया कांड में मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा उर्फ मोनू को मंगलवार को बड़ा झटका लगा और इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने जमानत याचिका खारिज कर दी. आशीष मिश्रा की जमानत अर्जी खारित करते हुए हाईकोर्ट लखनऊ बेंच में जस्टिस कृष्ण पहल की सिंगल बेंच ने मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि आजकल मीडिया कंगारू कोर्ट चला रहा है, न्यायिक पवित्रता की हदें लांघ रहा है, जैसा जेसिका लाल, इंद्राणी मुखर्जी और आरुषि तलवार केस में किया था.

कोर्ट ने अपने आदेश में इस पूरे मामले में मीडिया की भूमिका पर सवाल खड़े किए और कहा कि अधकचरी सूचना के बल पर आजकल मीडिया कंगारू कोर्ट चला रहा है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में मोनू की संलिप्तता, गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका, अपराध की गंभीरता और कानूनी व्यवस्थाओं पर गौर करते हुए आरोपी को जमानत देने का मामला नहीं बनता है.

कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान से घटनास्थल पर आशीष मिश्रा का थार गाड़ी से बाहर निकल कर आना उसके खिलाफ जाता है. हालांकि, कोर्ट ने घटना पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि अगर दोनों पक्षों ने थोड़ा संयम दिखाया होता तो आठ लोगों की जान न गई होती. घटनास्थल पर किसानों के उग्र व्यवहार पर भी कोर्ट ने टिप्पणी की और कहा कि जिला प्रशासन ने इलाके में धारा 144 लगा रखी थी, जो आरोपी आशीष और उसके साथियों के साथ-साथ पीड़ित पक्ष के किसानों पर भी लागू होती थी लेकिन दोनों ही पक्षों ने उसका पालन नहीं किया.

सुनवाई के दौरान अपने-अपने पक्ष में आशीष और पीड़ितों ने घटना से जुड़ी तमाम तस्वीरें और वीडियो पेश किए थे. इस पर कोर्ट ने कहा कि जनहित से जुड़े मामलों को हाईलाइट करने में मीडिया की भूमिका है लेकिन कई बार देखने में आता है कि व्यक्तिगत विचार खबर पर हावी हो जाते हैं, जिससे सत्य पर विपरीत असर पड़ता है. कोर्ट ने कहा कि अब तो इलेक्ट्रॉनिक, सोशल मीडिया और खासकर टूलकिट के कारण समस्या और बढ़ गई है.

Tags: Ashish Mishra, Lucknow news, Uttar pradesh news



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