Mathura: मथुरा में विकास के नाम पर 12 करोड़ की बंदरबांट! शिकायत और सुनवाई करने वाले ‘लापता’


चंदन सैनी

मथुरा. यूपी सरकार हर शहर और गांव को स्मार्ट बनाने की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत ठीक इसके विपरीत है. इसकी गवाही मथुरा का वार्ड नंबर-22 चीख-चीख कर दे रहा है और यहां रह रहे लोगों का जीवन नरक बन गया है. दरअसल यहां रह रहे लोगों को ना तो पीने के लिए पानी मिल रहा है और ना ही वार्ड से बाहर जाने के लिए सड़क की सुविधा है. जबकि वार्ड में रह रहे लोगों के लिए बारिश एक आफत की तरह है, जो घरों से निकले पर पाबंदी बनकर आसमान से गिरती है. बारिश के मौसम में यहां के रास्ते ताल तलैया में तब्दील हो जाते हैं.

वार्ड वासियों का कहना है कि पार्षदी चुनाव के समय अनीता गुर्जर ने खूब बड़े-बड़े वादे किए थे. कहा था कि वार्ड नंबर-22 में विकास कार्यों की गंगा बहा दूंगी. वहीं, वार्ड वासियों ने भी विकास की आस में पार्षदी चुनाव में अनीता के लिए वोटों की गंगा बहा दी, लेकिन हकीकत में हुआ कुछ ऐसा कि वार्ड में आज भी विकास कीचड़ में ही लोट-पोट रहा है. जबकि पार्षद के यहां विकास गंगा में गोते लगा रहा है. दरअसल वार्ड में 12 करोड़ रुपए के विकास कार्य करा दिए गए, लेकिन यह आज तक किसी को पता नहीं चला कि विकास आखिर हुआ कहां है?

विकास के लिए 12 करोड़ का झूठ !

महापौर का कहना है कि वार्ड नंबर-22 के विकास के लिए 12 करोड़ रुपए दिए गए थे, जो कि विकास कार्यों में लगा दिए गए हैं. वहीं वार्ड नंबर- 22 की पार्षद अनीता गुर्जर के प्रतिनिधि गंभीर गुर्जर ने 5 करोड रुपए विकास कार्यों में खर्च होने की बात कह रहे हैं. अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है या तो मेयर साहब झूठ बोल रहे हैं या वार्ड नंबर-22 के पार्षद का प्रतिनिधि गुमराह कर रहा है.

कौन देगा 7 करोड़ का हिसाब ?

वार्ड में विकास कार्यों के लिए यदि 12 करोड़ दिए गए थे और 5 करोड़ ही खर्च हुए हैं तो 7 करोड रुपए आखिर कहां गए ?  ऐसे में यदि वार्ड में 5 करोड रुपए ही लगे हैं, तो महापौर मुकेश आर्य बंधु क्यों वाहवाही लूट कर 12 करोड़ रुपए के विकास कार्यों को गिना रहे हैं. दावों, आरोपों और मौजूदा हकीकत से इतना तो पक्का है कि विकास कार्यों में लगने वाले बजट का जमकर बंदरबांट किया गया है.

शिकायत लेकर जाओ तो भगा देती हैं पार्षद

स्थानीय लोगों से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि विकास कार्यों के लिए जब भी वार्ड पार्षद अनीता गुर्जर के पास जाते हैं. वह हमें अपने घर से भगा देती हैं. शिकायत लेकर दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं, लेकिन कोई भी सुनने को तैयार नहीं है. स्थानीय महिला कृष्णा ने बताया कि 15 साल से यहां हम लोग रह रहे हैं. जीतने से पहले अनीता गुर्जर ने थोड़े बहुत छोटे-मोटे काम करा दिए, ताकि वह जीत जाएं और वह पार्षद भी बन गईं. पार्षद बनते ही वह अब हम लोगों को पहचानने से भी मना कर देती हैं. जब से जीतकर आईं हैं वार्ड में 1 दिन भी यह देखने के लिए नहीं आईं कि यहां की स्थिति क्या है.

गंदे पानी में पल रहीं जानलेवा बीमारियां

स्थानीय नागरिक डॉ. जितेंद्र धनगर ने बताया कि, जलभराव के चलते यहां आए दिन बच्चे बीमार होते हैं. आलम यह है कि डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड जैसी खतरनाक बीमारियां बच्चों को अपनी चपेट में ले रही हैं. सड़क पर भरा गंदा पानी बीमारियों की सबसे बड़ी वजह है

स्थानीय लोग करेंगे वोट बहिष्कार

वार्ड नंबर-22 के स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछली बार तो हमने वोट दे दिए थे, लेकिन इस बार के चुनाव में हम लोग किसी को भी वोट नहीं देंगे. अगर हमारी समस्या का समाधान चुनाव से पहले हो जाता है तो हम वोट करेंगे. अन्यथा इस बार हमारा वार्ड नंबर-22 किसी को भी वोट नहीं देगा.

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