माता लक्ष्मी और द्रौपदी ने किसे बांधी थी राखी, क्या है रक्षा बंधन को लेकर मान्यता; जानें कहानी


रिपोर्ट- सर्वेश श्रीवास्तव

अयोध्या: सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को रक्षा बंधन (रक्षाबंधन) का त्योहार मनाया जाता है. रक्षा बंधन का दिन भाई-बहन के प्रेम का पावन पर्व माना जाता है. इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई के लंबी उम्र की कामना करती हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि रक्षा बंधन की शुरुआत कैसे हुई? कब से चली आ रही है यह परंपरा ?. आज हम आपको बताएंगे कैसे शुरू हुई रक्षा बंधन की परंपरा.

राजा बलि को मां लक्ष्मी ने बांधा था रक्षासूत्र
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, रक्षा बंधन को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं. ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम बताते हैं कि रक्षा बंधन की परंपरा सतयुग से चली आ रही है. राजा बलि जब सवा विष्णु यज्ञ कर रहे थे. तब भगवान विष्णु बालक रूप धारण कर उनके आश्रम पहुंचे और उनसे तीन पग भूमि दान में देने की मांग की. घमंड में चूर राजा बलि ने संकल्प लेते हुए भगवान विष्णु को तीन पग भूमि देने का निर्णय लिया. भगवान विष्णु ने एक पग से आकाश लोक और दूसरे पग से पाताल लोक नाप लिया और जैसे ही तीसरा पग उठाए तब राजा बलि का घमंड टूटा और उसने अपना सर भगवान विष्णु के सामने रख दिया. तब भगवान विष्णु प्रसन्न होकर राजा बलि से कहते हैं वरदान मांगो. वरदान मांगते हुए राजा बलि ने भगवान विष्णु से कहा प्रभु हमें ऐसा वरदान दीजिए कि आप मेरे सम्मुख हर क्षण बने रहें. वहीं, दूसरी तरफ क्षीर सागर में भगवान विष्णु के ना होने पर माता लक्ष्मी जी बिफर उठीं. तब राजा बलि के पास माता लक्ष्मी आती हैं, राजा बलि भी माता लक्ष्मी के अत्यंत भक्त थे. उसी समय माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधा तभी से रक्षा बंधन की परंपरा चली आ रही है.

श्रीकृष्ण को द्रौपदी ने बांधा था आंचल
ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम बताते हैं कि रक्षा बंधन को लेकर महाभारत काल में भी वर्णन मिलता है. शिशुपाल के सौ अपराध पूरे होने के बाद भगवान कृष्ण ने सुदर्शन चक्र चलाया था. उस समय भगवान कृष्ण की अंगुली कट गई थी. जिसको देखते हुए महारानी द्रौपदी ने आंचल का पल्लू फाड़कर अंगुली में बांध दिया. मान्यताओं के आधार पर कहा जाता है कि तभी से रक्षा बंधन की शुरुआत हुई है.

जानिए क्या है रक्षा बंधन का महत्त्व
रक्षा बंधन के दिन बहन अपने भाई की कलाई में रक्षा का सूत्र बांधती हैं और अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करती हैं. रक्षा का तात्पर्य है सुरक्षा और बंधन का तात्पर्य बांध. रक्षा बंधन के दिन बहन ने अपने भाई के खुशहाली तरक्की के लिए भगवान से प्रार्थना भी करती हैं और आरती उतारती हैं.

नोट: यहां दी गई जानकारी मान्यताओं के आधार पर है news18 इसकी पुष्टि नहीं करता.

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