Lucknow : नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लखनऊ यूनिवर्सिटी ने कई पाठ्यक्रमों में किया बदलाव, जानें मामला


रिपोर्ट- अंजलि सिंह राजपूत

लखनऊ. यूपी के लखनऊ विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (The National Education Policy of India 2020) के तहत अपने ज्यादातर पाठ्यक्रमों को अपडेट कर दिया है. अगर स्नातक अर्थशास्त्र की बात करें तो अब स्नातक अर्थशास्त्र में छात्र-छात्राएं भारतीय आर्थिक चिंतकों के बारे में भी पढ़ सकेंगे. भारतीय आर्थिक चिंतक यानी कौटिल्य, पंडित दीनदयाल उपाध्याय,डॉ भीमराव अंबेडकर, महात्मा गांधी, चौधरी चरण सिंह और जेके मेहता जैसी हस्तियों के बारे में भी छात्र-छात्राएं अब पढ़ सकेंगे. आर्थिक चिंतकों को स्नातक अर्थशास्त्र में सातवें सेमेस्टर में पहली बार शामिल किया गया है. वहीं, स्नातक के पांचवें, छठे और सातवें सेमेस्टर के पाठ्यक्रम में कई नए पेपर शामिल किए गए हैं.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अपडेट किए गए स्नातक अर्थशास्त्र में छात्र-छात्राएं छठे सेमेस्टर में उत्तर प्रदेश की आर्थिक स्थिति के साथ ही यहां पर रोजगार की व्यवस्थाओं और औद्योगिक विकास से जुड़ी जानकारी भी पढ़ सकेंगे. इसके अलावा बात करें इसी के 5 सेमेस्टर की तो इसमें पर्यावरण का अर्थशास्त्र, आर्थिक विकास और उपाय की जानकारी भी पाठ्यक्रम में शामिल की गई हैं.वहीं, बीबीए में दुनिया के पर्यटन संसाधनों, लोकप्रिय पर्यटन स्थल की जानकारी और उनकी विशेषताएं यह सब कुछ पढ़ सकेंगे छात्र बीबीए में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत.

जिम्मेदार नागरिक बनेंगे छात्र-छात्राएं
लखनऊ विश्वविद्यालय के डीन एकेडमिक प्रो. राकेश चंद्रा ने बताया कि सभी पाठ्यक्रमों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बदलाव किया जा रहा है. अर्थशास्त्र के अलावा उनके अपने खुद के कोर्स दर्शनशास्त्र में भी काफी पाठ्यक्रम अपडेट किया गया है. इसके अलावा छात्र-छात्राएं अब इंटर्नशिप कर सकेंगे. उन्होंने बताया कि पॉलिटिकल साइंस विभाग में भी पाठ्यक्रम को अपडेट किया है. इसके अलावा साइकॉलजी विभाग ने अपने यहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम को अपडेट करते हुए वैलनेस एंड हैप्पीनेस वेलबीइंग को जोड़ा है.उन्होंने बताया कि इसी तरह अन्य पाठ्यक्रमों को भी नई शिक्षा नीति के तहत अपडेट किया जा रहा है. उनका दावा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत छात्र छात्राएं देश के एक बेहद जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे.

Tags: Lucknow News Today, National Education Policy



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