लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 से बढ़ाकर 21 साल होगी, जानिये क्यों?

नई दिल्ली। भारत में जल्द ही लड़कियों के विवाह की वैधानिक उम्र बदल जाएगी. केंद्रीय कैबिनेट ने देश में लड़कियों की शादी करने की वैध उम्र 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, बुधवार को कैबिनेट की बैठक में लड़कियों की शादी की उम्र बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. इसके लिए सरकार मौजूदा क़ानूनों में संशोधन के लिए संसद में बिल करेगी.
कानून के हिसाब से क्या उम्र है?

इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट 1872, पारसी मैरिज एंड डिवोर्स एक्ट 1936, स्पेशल मैरिज एक्ट 1954, और हिन्दू मैरिज एक्ट 1955, सभी के अनुसार शादी करने के लिए लड़के की उम्र 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष होनी चाहिए. इसमें धर्म के हिसाब से कोई बदलाव या छूट नहीं दी गई है. फिलहाल बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 लागू है. जिसके मुताबिक़ 21 और 18 से पहले की शादी को बाल विवाह माना जाएगा. ऐसा करने और करवाने पर 2 साल की जेल और एक लाख तक का जुर्माना हो सकता है.
पिछले साल 15 अगस्त को देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि लड़कियों की शादी की उम्र को लेकर सरकार समीक्षा कर रही है. उन्होंने कहा कि लड़कियों की शादी की सही उम्र क्या हो, इसके लिए कमेटी बनाई गई है, उसकी रिपोर्ट आते ही बेटियों की शादी की उम्र को लेकर उचित फैसला लिया जाएगा. अब सरकार लड़कियों के लिए इस सीमा को बढ़ाकर 21 साल करने पर विचार कर रही है. सांसद जया जेटली की अध्यक्षता में 10 सदस्यों की टास्क फ़ोर्स का गठन किया गया है, जो इस पर अपने सुझाव जल्द ही देगी.

दरअसल, बेटियों की शादी की उम्र को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने एक याचिका दायर की थी. उन्होंने कहा था कि लड़कियों और लड़कों की शादी की उम्र का कानूनी अंतर खत्म किया जाए. इस याचिका पर जब केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया तो केंद्र ने बताया था कि इस मामले पर एक टास्ट फोर्स का गठन किया गया है.
इन सिफारिशों के आधार पर कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है.द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में जेटली ने कहा कि टास्क फोर्स की सिफारिशों की मंशा जनसंख्या पर नियंत्रण पाना नहीं है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे में यह सामने आया है कि भारत के कुल प्रजनन दर में कमी आई है. अभी भारत का कुल प्रजनन दर 2.2 है.
लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने के पीछे असली मकसद महिलाओं का सशक्तिकरण करना है. सरकार ने टास्क फोर्स का गठन मातृत्व की उम्र से संबंधित मामलों, मातृ मृत्यु दर को कम करने और पोषण में सुधार से संबंधित मामलों की जांच के लिए किया था.