Kisan Andolan: नरेश टिकैत का बड़ा बयान, बोले- लंबे समय तक चलेगा आंदोलन, सत्यपाल मलिक जैसे और लोग आएंगे साथ

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में नरेश टिकैत जमकर किसान महापंचायत कर रहे हैं.
केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में नरेश टिकैत जमकर किसान महापंचायत कर रहे हैं.


केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में नरेश टिकैत जमकर किसान महापंचायत कर रहे हैं.

भारतीय किसान यूनियन के राष्‍ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत (Naresh Tikait) ने कृषि कानूनों (Agricultural Law) को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा है. इसके अलावा उन्‍होंने कहा कि मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक जैसे और लोग किसानों के समर्थन में आगे आएंगे.

गाजियाबाद. भारतीय किसान यूनियन के राष्‍ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत (Naresh Tikait) ने कृषि कानूनों (Agricultural Law) की आलोचना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) विश्वास के लायक नहीं हैं. उन्‍होंने यह बात दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर स्थित गाजियाबाद में किसान यूनियन की मासिक बैठक में कही.

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, नरेश टिकैत ने कहा कि यह आंदोलन लंबे समय तक चलेगा, इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं. भाजपा और सरकार भरोसे के लायक नहीं हैं.

सत्यपाल मलिक जैसे और लोग बनेंगे हिस्‍सा
यही नहीं, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक के मुताबिक, नरेश टिकैत ने कहा कि सत्यपाल मलिक (मेघालय के राज्यपाल) जैसे और लोग आगे आएंगे. किसान उनकी सच्चाई का सम्मान करते हैं. भाजपा सांसद अब घुटन महसूस कर रहे हैं. बता दें कि मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने रविवार को किसान आंदोलन के समर्थन में बयान दिया था.नरेश टिकैत का ये है आरोप

इससे पहले नरेश टिकैत ने कहा था कि केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानून किसानों के हक में नहीं है और यह बात सरकार भी जानती है, लेकिन अपनी जिद के चलते वह किसानों की बात सुनने को तैयार नहीं है. टिकैत ने दावा किया कि भाजपा में ऐसे कई नेता हैं जो इस समस्या को सुलझा सकते हैं, लेकिन उन पर भी दबाव बनाया हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि कृषि कानूनों को सरकार को वापस लेना ही होगा, यह शर्त माने जाने तक किसान पीछे नहीं हटेंगे. इसके अलावा उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को कई नाम दे रही है, जो किसानों के लिए अपमान की बात है, लेकिन सरकार यह भूल गई है कि किसानों का शोषण करने वाला कभी सफल नहीं हुआ है. इसका परिणाम उसे भुगतना ही पड़ेगा.






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