खतरे में झांसी की रानी का किला! पहले निगम ने नींव पर पाथवे बनाया, अब उसी को बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा ने तोड़ा


झांसी. रानी लक्ष्मीबाई का विश्वप्रसिद्ध किला इन दिनों सुर्खियों में बना है, वैसे तो ये किला हमेशा ही सुर्खियों में रहता है लेकिन इस बार बात खतरे की है. एक संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार किले की नींव से छेड़छाड़ होने के बाद इस ऐतिहासिक धरोहर के लिए खतरा हो गया है. उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले ही स्मार्ट सिटी के तहत नगर निगम ने किले की तलहटी से लेकर किले की नींव तक विकास कार्य करना शुरू किया. इस दौरान किले की नींव पर निगम ने पाथवे का निर्माण किया. इस पाथवे के निर्माण के लिए निगम ने हैवी मशीनें लगा कर नींव से बड़े-बड़े पत्‍थरों को निकाला था. इसी बात पर बवाल शुरू हुआ और बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा ने ‌निगम के साथ ही एएसआई के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया. पहले इस बात को लेकर अनशन किया गया लेकिन जब किसी ने भी बात नहीं सुनी तो मोर्चे के लोगों ने निगम की ओर से बनाए गए पाथवे को ही तोड़ दिया.

बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के पदाधिकारियों ने इसके खिलाफ शिकायत कमिश्नर से लेकर जिलाधिकारी तक से की. लेकिन कोई भी प्रभावी कार्रवाई होती न देख पदाधिकारियों ने पाथवे पर ही बैठकर 14 दिनों का अनशन भी किया. इस दौरान मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु सहाय ने कहा कि रानी का किला ऐतिहासिक और संरक्षित धरोहर है, एएसआई के नियमों के अनुसार इसमें किसी भी तरह का विकास या निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता. लेकिन पाथवे का निर्माण कर एएसआई ने खुद ही अपने नियमों को तोड़ा और नगर निगम को किन परिस्थितियों में संरक्षित किले के अंदर निर्माण की अनुमति दी गई.

जब किसी ने न सुनी तो तोड़ दिया

वहीं जब अधिकारियों ने बुंदेलखंड मोर्चा की एक भी बात को नहीं सुना और कोई भी कार्रवाई नहीं की गई तो मोर्चे के सदस्यों ने खुद ही किले की तलहटी में बने निगम के पाथवे को तोड़ दिया. बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा ने सरेआम सरकारी बजट से बने पाथवे को तोड़ा लेकिन इस दौरान जिला प्रशासन या निगम की ओर से किसी को रोका नहीं गया और सभी अधिकारी चुप्पी साधे दिखे.

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