कभी हेलीकॉप्टर से आया था सपा का टिकट, अब ढहा दिया आजम का किला, जानें घनश्याम लोधी की पूरी कहानी


रामपुर. रामपुर लोकसभा उपचुनाव में जीतने वाले भाजपा के घनश्याम सिंह लोधी पहली बार संसद प‌हुंचे हैं. घनश्याम लोधी का संसद पहुंचने का सपना वर्षों पुराना है. लोकसभा के इस उपचुनाव से पहले घनश्याम लोधी बसपा के ‌टिकट पर दो बार लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन दोनों बार वह चुनाव हार गए थे. वह दो बार सपा से एमएलसी रह चुके हैं. अब लंबे राजनीतिक सफर के बाद उन्हें लोकसभा उपचुनाव में जीत मिली है.

लोकसभा का उपचुनाव जीते घनश्याम सिंह लोधी ने अपनी राजनीति की शुरूआत भाजपा से ही की थी. वह भाजपा में जिला स्तर पर कई पदों पर रह चुके हैं. इसके अलावा करीब 40 साल तक गांव की प्रधानी पर भी उनके परिवार का कब्जा रहा. वर्तमान में भी उनके भतीजे की पत्नी प्रेमवती लोधी ग्राम प्रधान हैं, लेकिन घनश्याम लोधी का सपना सांसद बनने का था. लिहाजा अपने सपने को साकारा करने के लिए घनश्याम सिंह लोधी ने 1999 में बसपा में शामिल हो गए और लोकसभा का चुनाव लड़ा. उस समय नवाब खानदान का रसूख था. ऐसे में उनकी जीत आसान नहीं थी. उन्हें केवल 15740 वोट ही मिल सके और वह बुरी तरह से चुनाव हार गए थे.

कल्याण सिंह की राक्रापा से पहली बार मिली थी कामयाबी

इसके बाद उन्होंने बसपा से भी नाता तोड़ लिया और कल्याण सिंह के नेतृत्व वाली जनक्रांति पार्टी में शामिल हो गए. सियासी सफर में घनश्याम सिंह लोधी को कामयाबी तब मिली, जब कल्याण सिंह के समर्थन से सपा की सरकार बनी. तब रामपुर-बरेली स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र की सीट जनक्रांति पार्टी के खाते में चली गई थी और सपा से घनश्याम सिंह लोधी उम्मीदवार बने. यह चुनाव वह जीत गए और पहली बार एमएलसी चुने गए. ‌किंतु, लोकसभा पहुंचने की चाहत में वह एक बार फिर बसपा में चले गए और उन्हें 2009 में टिकट भी मिल गया, लेकिन यह चुनाव आसान नहीं था. हालांकि, उन्हें तब भाजपा प्रत्याशी रहे व वर्तमान में केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी से अधिक वोट मिले थे. तब उन्हें 95132 मत प्राप्त हुए थे.

आजम के भी रहे करीबी, सपा से वह दूसरी बार एमएलसी बने 

कुछ ही समय के बाद वह फिर से सपा में शामिल हो गए और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें रामपुर-बरेली स्थानीय निकाय प्राधिकार क्षेत्र से टिकट मिल गया. सपा नेता आजम खां से नजदीकियां होने की वजह से उनका टिकट भी हेलीकॉप्टर से आया था. जिसके बाद वह दूसरी बार एमएलसी बने अब घनश्याम लोधी 2022 विधानसभा चुनाव से पहले ही भाजपा में शामिल हो गए. उनकी मंशा तीसरी बार एमएलसी बनने की थी, लेकिन उन्हें इस बार टिकट नहीं मिला.

भाजपा के भरोसे पर खरे उतरे घनश्याम

लेकिन आजम खां के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद आजम खान ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद सीट रिक्त हो गई. चुनाव आयोग ने उपचुनाव का ऐलान कर दिया तो घनश्याम सिंह लोधी ने भी ताल ठोक दी. इस बार भाजपा नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें टिकट दे दिया. वह रविवार को चुनाव भी जीत गए. जिसके बाद लोकसभा पहुंचने का उनका वर्षों पुराना सपना साकार हो गया. लोकसभा के इस उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी घनश्याम लोधी को 3,67,397 वोट मिले. वहीं सपा प्रत्याशी आसिम राजा को 3,25,205 वोट मिले. भाजपा प्रत्याशी घनश्याम लोधी ने सपा प्रत्याशी को 42,192 वोटों से हराकर जीत हासिल की.

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