काशी-तमिलियन का DNA एक, BHU और हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने किया चौंकाने वाला खुलासा, जानें सब कुछ


वाराणसी. बाबा विश्वनाथ के शहर बनारस (Banaras) में हो रहे ‘काशी तमिल संगमम’ में दो राज्यों की सभ्यता और संस्कृति का समागम देखने को मिल रहा है. इस संगमम के बीच बीएचयू (BHU) और हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने चौंकाने वाला दावा किया है. रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने काशी और तमिलनाडु के पूर्वजों के डीएनए को भी सेम बताया है. काशी के 100 और तमिलनाडु के 200 लोगों के जीनोम पर रिसर्च के बाद ये चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं. ये रिसर्च उतर और दक्षिण भारत के मजबूत सम्बंध पर वैज्ञानिक मुहर भी लगाता है.

बीएचयू के जीव विज्ञानी प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि काशी और तमिलियन लोगों के पूर्वज एक ही थे और वो चार अलग-अलग मानव जातियों से जुड़े थे. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा सिंधु घाटी की सभ्यता से जुड़ा था. इसके बाद गंगा घाटी, अंडमान जाति, ईरान से जुड़ा था. जो कहीं न कहीं इस बात पर मुहर लगाता है कि दोनों ही राज्यों के पूर्वज एक ही थे.

इस कारण दिखाई देती है भिन्नता
उन्होंने बताया कि जीनोम के चार हिस्से होते है. वर्तमान समय में जो काशी और तमिलियन लोगों के बीच एकरूपता नहीं है. उसकी वजह है जीनोम के वो कम्पोरनेंट्स जो काशी और तमिलियन दोनों में तो पाए जाते हैं, लेकिन उसकी मात्रा कहीं कम तो कहीं ज्यादा जिसके कारण वर्तमान समय में इनके रंग रूप में भिन्नता दिखाई देती है.

बीएचयू और सीसीएमबी हैदराबाद के वैज्ञानिक रहे शामिल
बात यदि इस रिचर्स की करें तो 2006 से देश के अलग-अलग जगहों के 75 वैज्ञानिक इस काम मे जुटे थे. इसके अलावा कई सारे रिसर्च स्कॉलर भी इसमें शामिल हुए. इन टीम ने अलग-अलग संस्थाओं से सैम्पल कलेक्ट किया और फिर उस पर लम्बे समय तक रिसर्च के बाद इन फैक्ट्स को पाया. इस रिसर्च में मुख्य रूप से बीएचयू के साथ सीसीएमबी हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने अहम भूमिका निभाई है. इसके अलावा कई छोटे-छोटे रिसर्च सेंटर भी इसमें शामिल हैं. प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि फिलहाल ये रिसर्च अभी जारी है. इसमें देश के अलग-अलग के लोगों में कितनी समानता है इसके बारे में वैज्ञानिक पता लगा रहे हैं.

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FIRST PUBLISHED : November 30, 2022, 20:02 IST



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