जज्‍बे को सलाम: मेरठ के तीन युवाओं ने गरीबी को मारा ‘पंच’, बॉक्सिंग चैंपियनशिप में दिखा जलवा


रिपोर्ट – शाश्वत सिंह

झांसी. शायर दुष्यंत कुमार का एक मशहूर शेर है, ‘कौन कहता है आसमान में सुराख हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो.’ इन पंक्तियों को तीन युवा खिलाड़ियों ने सच साबित कर दिखाया है. झांसी में आयोजित प्रदेश स्तरीय मुक्केबाजी प्रतियोगिता में अभिनव और डैनी चौहान ने गोल्ड, तो रचित गिरी ने सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया है. मूलतः मेरठ के रहने वाले इन तीनों युवाओं ने अपना दम दिखाया है. प्रदेश स्तर पर आयोजित इस प्रतियोगिता में 100 से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था.

तीनों ही युवा सामान्य पृष्ठभूमि से आते हैं. सभी के पिता किसान हैं. गरीब परिवार से आने के बावजूद इन युवाओं ने हार नहीं मानी और मुक्केबाजी में अपना करियर बनाने का निर्णय लिया. अभिनव ने अपने घर के पीछे से ही मुक्केबाजी शुरू की थी. इसके बाद उन्होंने स्टेडियम में जाकर प्रैक्टिस करनी शुरू की.जबकि डैनी चौहान ने अपने बड़े भाई से बॉक्सिंग करनी सीखी है, तो रचित गिरी ने बताया कि वह पहले अपने स्कूल में प्रैक्टिस करते थे. बॉक्‍सर विजेंद्र सिंह को देखकर उन्होंने बॉक्सिंग करना शुरू किया था. उनके घरवालों ने भी बड़ी मुश्किल से पैसे जोड़कर बॉक्सिंग किट उपलब्ध करवाई थी.

मेहनत का नहीं है कोई विकल्प
तीनों युवाओं ने कहा कि वो भारत के लिए ओलंपिक में खेलना चाहते हैं. इसके लिए तैयारी भी जारी है. उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा दी गई सुविधाओं की मदद से उनका मुक्केबाज बनने का सपना साकार हो रहा है. उनका अगला लक्ष्य नेशनल मुक्केबाजी चैंपियनशिप में हिस्सा लेना है. युवाओं ने कहा कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता. गौरतलब है कि झांसी में एक सप्ताह तक चले प्रादेशिक अंडर 16 मुक्केबाजी प्रतियोगिता में मेरठ और वाराणसी की टीमें अव्वल रही हैं.

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