जगतगुरु रामानंदाचार्य की जयंती पर नई पहल, संत परमहंस दास ने दलित समाज को दी दीक्षा

तपस्वी छावनी के संत परमहंस दास.
तपस्वी छावनी के संत परमहंस दास.


तपस्वी छावनी के संत परमहंस दास.

जगतगुरु रामानंदाचार्य (Jagatguru Ramanandacharya) की जयंती के अवसर तपस्वी छावनी के संत परमहंस दास (Saint Paramahamsa Das) ने एक दलित और एक सफाई कर्मी को गुरु मंत्र देकर अपना शिष्य बनाकर मिसाल पेश की है.

अयोध्या. राम उपासकों के बड़े धर्मगुरु रहे जगतगुरु रामानंदाचार्य (Jagatguru Ramanandacharya) की जयंती के अवसर पर अयोध्या में एक बार फिर उनके मार्ग का अनुसरण किया गया. तपस्वी छावनी के संत परमहंस दास (Saint Paramahamsa Das) में एक दलित और एक सफाई कर्मी को गुरु मंत्र देकर अपना शिष्य बनाया और देश से छुआछूत समाप्त करने का आवाहन किया. आपको बता दें कि जगतगुरु रामानंदाचार्य ने ही कबीर और रैदास को गुरु मंत्र देकर अपना शिष्य बनाया था जो बाद में अपनी रचना को लेकर विश्व विख्यात हुए. संत परमहंस दास का मानना है कि भारत में छुआछूत और जातियों में वैमनस्य विदेशी आक्रांता ने फैलाया. साथ ही कहा कि भारत में जब तक भगवान विश्वकर्मा की पूजा नहीं होती तब तक कोई कार्य शुरू नहीं होता. राम मंदिर का निर्माण भी भगवान विश्वकर्मा की पूजा के बाद शुरू हो रहा है. यही नहीं, खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सफाई कर्मी के पैर धुलते हैं. ऐसे में अब समय आ गया है की जगतगुरु रामानंदाचार्य के दिखाए मार्ग पर चला जाए जिससे भारत में छुआछूत और आपसी वैमनस्य समाप्त हो सके.

तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने कहा कि जगतगुरु रामानंदाचार्य भगवान सभी राम भक्तों के आज्ञा चार्य सबसे बड़े गुरु हैं और आज उनकी जयंती है. रामानंदाचार्य भगवान ने उस समय रविदास को गुरु मंत्र दिया था और पूरा विश्व उनको जानता है. भगवान की भक्ति करने का सभी को अधिकार है, लेकिन विदेशी मुगल आक्रांता ने भारतीय संस्कृति को तोड़ने के लिए षड्यंत्र के तहत यहां पर छुआछूत का भ्रम फैलाकर एक दूसरे में बांटा. यही अंग्रेजों का रोल आज तक चलता रहा है. इसके साथ उन्‍होंने कहा, ‘हमारे पास कुछ सफाई कर्मी आते हैं और रोकर कहने लगते हैं कि हम 20 साल से जिस भी धर्मगुरु या साधु-संतों के पास जाते हैं, लेकिन वो हमें भगा देते हैं.तुम हरिजन हो तुम्हें दीक्षा नहीं देंगे. तुम सफाई कर्मी हो, तुम हमको ना छुवो. हम तुम्हें मंत्र नहीं देंगे. इसका सुनकर मेरी आंखों में आंसू आ गए और मुझे दुख हुआ. इसक साथ महंत परमहंस दास ने कहा कि हमारे वेदों-पुराणों से लेकर के शास्त्रों में सभी हिंदुओं को बराबर का अधिकार दिया गया है. भगवान की सेवा करने का सभी को अधिकार है. महाभारत में जब तक बाल्मीकि की पूजा नहीं हुई तब तक उनका यज्ञ पूरा नहीं हुआ. जब सफाई कर्मी का सम्मान हुआ तब घंटा बजना शुरू हो गया. हमारे यहां कोई जात पात या छुआछूत नहीं थी बल्कि यह विदेशी षड्यंत्र है.

महंत परमहंस दास ने दिया यह भरोसा
तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने कहा कि आज हमारे पास दलित समाज से दलित पहलाद (हरिजन) आए जिन्‍हें हमने संत रविदास की उपाधि देते हुए धर्म के प्रचार में लगा दिया है. यह हमारे सफाई कर्मी हैं और आज से यह भी धर्म का प्रचार करेंगे. सभी धर्म आचार्यों से मेरी प्रार्थना है कि सभी को एक समान देखिए छुआछूत जैसी बीमारी को अपने दिल और दिमाग से निकाल दें. इसके साथ कहा कि देश के कोने कोने में जाकर जो हमारे दलित भाई हैं इन सभी को धर्म के प्रचार में लगाऊंगा. दास ने पहलाद से कहा कि छुआछूत जैसी बीमारी लोगों के दिमाग से खत्म हो और समाज में आपको सबसे आगे रखा जाएगा और यह मैं वचन देता हूं.इसके अलावा सफाई कर्मी प्रेमलाल ने कहा कि महाराज जी से आज हमने गुरु मंत्र लिया है. आज तक हमें किसी ने गुरु मंत्र नहीं दिया है. हम उनका शुक्रिया अदा करते हैं. वहीं, दलित प्रह्लाद ने कहा कि हम आए और महाराज जी से गुरु मंत्र लिया. हम भगवान राम लक्ष्मण को मानते हैं.






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