हरियाणा महिला आयोग में पहुंचा मामला, युवती ने अलग अलग थानों में दर्ज कराये दुष्कर्म के सात मामले

हरियाणा में एक युवती ने एक साल में अलग अलग दुष्कर्म के 7 मामले दर्ज करवाए है जिससे हड़कंप मच गया है क्योंकि मामला हरियाणा के महिला आयोग के पास पहुंच गया है। युवती ने सात अलग-अलग पुरुषों पर अलग-अलग थानों में यौन उत्पीड़न तथा दुष्कर्म की एफआइआर दर्ज कराई है। मामला गुरुग्राम का है।

गुरुग्राम के कुछ लोगों ने इस बारे में राज्य महिला आयोग को शिकायत भेजी है। महिला आयोग की कार्यवाहक चेयरपर्सन प्रीति भारद्वाज को प्राथमिक तौर पर सभी मामले सच्चाई से दूर लगे। उन्होंने पुलिस महानिदेशक पीके अग्रवाल को एक पत्र भेजकर एसआइटी गठित करने तथा सभी मामलों की जांच कराने का अनुरोध किया है।
राज्य महिला आयोग की कार्यवाहक चेयपर्सन प्रीति भारद्वाज का मानना है कि इसमें कोई शक नहीं है कि कानून महिलाओं के हितों की रक्षा करता है और उनके लिए बना है, लेकिन इस कानून का दुरुपयोग करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। एसआइटी जांच में यदि गुरुग्राम की इस लड़की द्वारा सात अलग-अलग लोगों के विरुद्ध अलग-अलग थानों में दर्ज कराई सातों प्राथमिकी सही हैं तो दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिये। यदि शिकायत निराधार और झूठी है तो ऐसी लड़की के विरुद्ध भी सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि कानून का कोई महिला दुरुपयोग न कर सके।
प्रीति भारद्वाज के अनुसार गुरुग्राम की एक 20 वर्षीय लड़की का नाम बताते हुए उन्हें विभिन्न माध्यमों से जानकारी दी गई है कि एक साल में सात पुरुषों पर दुष्कर्म व यौन उत्पीड़न के अलग-अलग मामले दर्ज होने में संदेह पैदा होता है। आयोग ने गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखते हुए अभी तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। लड़की द्वारा आखिरी एफआइआर 24 अक्टूबर को दर्ज कराई गई है। भारद्वाज का मानना है की महिला सुरक्षा आयोग के लिए सर्वोपरि विषय है। आयोग का ऐसा भी मानना है कि कानून हर व्यक्ति को सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसमें लिंग भेद नहीं चलता।
प्रीति भारद्वाज के अनुसार, ऐसे कुछ मामले आयोग के समक्ष आए हैं, जिसमे महिलाओं द्वारा कानून का कहीं न कहीं गलत प्रयोग किया जा रहा है। कानून वह दोधारी तलवार है जो कि सभी के अधिकारों के संरक्षण के लिए बनाए जाते हैं, तो कई बार इन्हीं कानूनों का दूसरे पक्ष या विरोधियों (कभी कभी पुरुषों) की स्वतंत्रता व अधिकारों का गला घोंटने के लिए दुरुपयोग किया जाता है।आयोग को ब्‍लैकमेलिंग, जबरन वसूली, फीमेल फेटल और हनी ट्रैपिंग जैसी शिकायतें प्राप्त हुई हैं। गुरुग्राम का मामला भी ऐसा हो सकता है। ऐसे में आयोग ने पुलिस का ध्यान सही तथ्यों की तरफ आकर्षित करने का बीड़ा उठाया है। एक सवाल के जवाब में प्रीति ने बताया कि इस बात की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता कि युवती के साथ कुछ प्रभावशाली लोग या पुलिस वाले मिले हो सकते हैं, जो केस दर्ज कराने के बाद समझौते के नाम पर दलाली करते होंगे।
आयोग ने पुलिस महानिदेशक पीके अग्रवाल को भी एक पत्र लिखते हुए कहा है कि पूरे मामले की जांच एसआइटी से कराई जाए तथा इसमें एक वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी शामिल रहे। इसके अलावा एक पुरुष पुलिस अधिकारी और तीन अन्य अधिकारी एसआइटी में शामिल किए जाएं। इस पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री कार्यालय, गृह मंत्री अनिल विज को भी भेजी गई है

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