होली खेलते समय आंखों पर चश्मा एवं त्वचा पर कोल्ड क्रीम के प्रयोग को न भूलें: कर्ण सिंह

हरदोई, 28 मार्च 2021, (आरएनआई)। होली रंगों का ऐतिहासिक त्योहार है हम सभी इसे बड़े धूमधाम से मनाते हैं लेकिन होली में थोड़ी सी भी लापरवाही हमें बहुत बड़ी मुसीबत में डाल सकती है। और यह कोई नही चाहेगा कि इस रंग-बिरंगे त्योहार में ‘रंग में भंग’ पड़े। दृष्टि दोष विशेषज्ञ कर्ण सिंह राणा कहते हैं कि चूंकि बाजार में मिलने वाले सिंथेटक रंग केमिकल से मिलाकर बनाया जाता हैं और ये पाउडर, पेस्ट और पानी वाले रंग के रूप में उपलब्ध होते हैं, इन्हें बनाने में सीसा जैसे धातुओं का प्रयोग किया जाता है। अगर उए रंग हमारी आँखों में चले जाये तो यह जलन , आँखों की सूजन जैसी कई समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। इसीलिए आप सभी होली खेलते समय इन सावधानियों को अवश्य ध्यान रखें. पहले के समय में होली के रंग और गुलाल बनाने में प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता था , ये आमतौर पर फूलों और वनस्पतियों के तत्वों से बनाए जाते थे लेकिन समय बीतने के के साथ- साथ पक्के और मजबूत रंगों का इस्तेमाल बढ़ने लगा। इसी के परिणामस्वरूप रासायनिक एवं कृत्रिम रंगों का प्रयोग होने लगा है और धीरे-धीरे घरेलू रंग गायब होते चले जा रहे हैं। दृष्टि दोष विशेषज्ञ कर्ण बताते हैं कि ऐसा देखा गया है कि आमतौर पर होली के बाद हॉस्पिटल में आंख की समस्याओं से ग्रस्त मरीजों की भीड़ लग जाती है। आंख शरीर का बेहद संवेदनशील हिस्सा होती हैं। अगर कोई भी केमिकल आंख में चला जाए तो आंखों में समस्या पैदा हो जाती है। अगर यह समस्या दो-चार दिनों में ठीक न हो अथवा तकलीफ असहनीय हो तो तत्काल डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है। आंखों से संबंधित किसी भी समस्या को ज्यादा दिन तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, यदि ऐसा है, तो तुरंत अपने नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास जाकर उनसे परामर्श अवश्य लें. दृष्टि दोष विशेषज्ञ कर्ण सिंह राणा कहते हैं कि होली खेलते वक़्त ध्यान रखें कि सिंथेटक रंगों के बजाय पर घर पर बने रंगों का इस्तेमाल करें, पानी वाले गुब्बारों से दूरी बरते, अगर आंख में रंग चला जाए तो तुरंत पानी के छींटे मारें, अपनी आंखों को बचाकर रखें। कोई रंग लगाने आए तो अपनी आंखों को पहले बचाने का प्रयास करें, चश्मा पहनें ताकि रंगों में मौजूद खतरनाक केमिकल आँखों में न जा सकें, नहाते समय और रंगों को निकालते समय आंखों को अच्छी तरह से बंद कर लें ताकि पानी के साथ बहता हुआ रंग आंखों में न चला जाए, बच्चों को गुब्बारों से खेलने के लिए उत्साहित न करें क्योंकि गुब्बारें कभी भी किसी को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं, रंग लगे हाथों को आंखों के पास न ले जाएं। हाथ अच्छी तरह धोने के बाद ही आंखों को छुएं। आंखों को मसलने या रगड़ने की गलती भी न करें, ऐसे लोगों से बचने का प्रयास करें जो कि हाथों से चेहरे पर रंग लगाने आएं। यदि कोई रंग लगाने आए तो आप आंखों और होंठों को बंद कर लें कि रंग आप के मुंह या आंखों में न जा पाए, होली खेलने से पहले चेहरे पर कोल्ड क्रीम की एक मोटी परत लगाएं ताकि रंग लगने के बाद जब आप अपना चेहरा धोएं तो रंग आसानी से निकल जाएगा। यदि इन सभी सावधानियों को बरतने के बाद भी यदि धोखे से आंखों में रंग चला जाए और आंखों में जलन, सूजन या दर्द हो तो साधारण साफ पानी से आंखें धोएं। थोड़ी देर देखें, फिर ऐसे हालातों में किसी बात का इंतजार न करें कि आंखों को किसी प्रकार का खतरा हो जाए, तुरंत अपने नेत्र रोग विशेषज्ञ से अवश्य संपर्क करें।

more recommended stories