Ganesh Chaturthi 2022: मेरठ में 30 साल से लग रहा है गणपति का पंडाल, जानें किसने की थी शुरुआत?


रिपोर्ट- विशाल भटनागर

मेरठ. रोजगार की तलाश में भले ही देश या विदेश के किसी कोने में चले जाएं, लेकिन अपनी संस्कृति और सभ्यता से जुड़े रहने में जो आनंद है वह कहीं नहीं. इस बात को मेरठ में रहने वाले मराठी परिवार सिद्ध कर रहे हैं. दरअसल 30 साल पहले इन्‍होंने मेरठ में गणेश चतुर्थी उत्सव की शुरुआत की थी. धीरे-धीरे यह उत्सव इतना विशाल होता गया कि आज मेरठ के हर घर में गजानन की पूजा-अर्चना विधि-विधान के साथ हो रही है.

गणेश चतुर्थी उत्सव मनाने वाले शिवानंद ने News18 Local से खास बातचीत करते हुए कहा कि 1992 में भगवान गणेश का विशाल पंडाल मेरठ में गणेश चतुर्थी के अवसर पर लगाया गया था, तो हर कोई इससे अनजान था. दरअसल यहां पर कोई भी गणेश चतुर्थी उत्सव नहीं मनाता था, लेकिन धीरे धीरे सभी में आस्था बढ़ती गई. अब दूर दराज से भी लोग इस पंडाल में गणेश जी के दर्शन करने आते हैं.

गणेश चतुर्थी पर बिकी हजारों मूर्तियां
मेरठ जिले में गणेश चतुर्थी के उत्सव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मूर्ति बनाने वाले प्रजापतियों ने भगवान गणेश की हजारों मूर्तियां बनाई थीं, जो अब सभी गणेश भक्तों द्वारा खरीद ली गई हैं.

गरुड़ पर विराजमान हैं गजानन
मेरठ के सदर में पहले तो बप्पा को रोड के बीच में पंडाल लगाकर विराजमान किया जाता था. अब मराठा परिवारों द्वारा भगवान गणेश के लिए एक स्थान भी खरीद लिया है. इतना ही नहीं इस पंडाल के लिए मराठा परिवार के लोग महाराष्ट्र से मूर्तियां भी लाते हैं, लेकिन अबकी बार विशेष ऑर्डर पर मेरठ में गरुड़ पर बैठे हुए गणेश जी की मूर्ति बनवाई है, जो कि काफी आकर्षक है.सुबह-शाम 7 बजे विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है. इसके बाद भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाया जाता है.

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