गैंगस्टर विकास दुबे का बिकरू पंचायत भवन पर था कब्जा! 22 महीने बाद खुला ताला तो निकला…


कानपुर. उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित बिकरू कांड के बाद एनकाउंटर में मारे गए हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे (Vikas Dubey) की कोठी के पास बने पुराने पंचायत भवन में उसका 653 बोरे में अनाज भरा मिला है. यह भवन विकास दुबे ने ही अपनी प्रधानी के दौरान बनवाया था और यहां अपने खेतों से गेहूं लाकर भरवाया दिया था, जो कि आज भी इसी पंचायत भवन के कमरों में रखा था. पंचायत भवन के दरवाजों पर विकास दुबे ने ताला लगाया हुआ था. इससे पहले ग्राम प्रधान मधु कमल ने डीएम को शिकायती पत्र भेज कर पंचायत भवन खाली कराने की मांग की थी. बता दें कि मधु देवी अब बिकरू गांव की प्रधान हैं.

बिकरू कांड के बाद गैंगस्टर विकास दुबे को एनकाउंटर में मारा जा चुका है, लेकिन 22 महीने बाद भी गांव में उसका खौफ जिंदा है. गांव वाले बताते हैं कि उसका पंचायत भवन पर कब्जा था, खेतों से आने वाले अनाज को पंचायत भवन के कमरों में भरा जाता था. यही से गांव का राशन वितरित होता था. कांड के बाद तहसील प्रशासन ने कमरों से गेहूं और चावल के करीब 653 बोरे कब्जे में लिए थे जिन्हें एक कमरे में रखवा कर ताला बंद कराया गया था. लेकिन उसके बाद से कोई देखने तक नहीं आया. कमरे में रखा अनाज दीमक लगने से खराब हो गया.

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बता दें कि 2 जुलाई 2020 को कानपुर में बहुचर्चित बिकरू कांड हुआ था, जिसमें विकास दुबे और उसके गुर्गों ने उन्हें पकड़ने के लिए गांव पहुंची पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी. इस मुठभेड़ में 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे. इस घटना ने तब खूब सुर्खियां बटोरी थी. इसके बाद पुलिस ने विकास दुबे के कई साथियों को एनकाउंटर में मार गिराया था, जबकि खुद विकास फरार हो गया था. पुलिस ने कुछ दिनों बाद उसे मध्य प्रदेश के उज्जैन में पकड़ा था. हालांकि यूपी लाने के दौरान रास्ते में कथित रूप से फरार होने के दौरान पुलिस की गोलियों से उसकी मौत हो गई थी.

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