Dussehra : दुर्गापूजा में बंगाली समाज के लिए घुनूची नृत्य होता है बेहद खास, जानिए वजह


रिपोर्ट : विशाल भटनागर

मेरठ. शक्ति की आराधना का पर्व है शारदीय नवरात्र. लेकिन भारत में अलग-अलग संस्कृति है और उनके अलग-अलग संस्कार हैं. मां भगवती की पूजा-अर्चना में भी संस्कारों का यह अंतर झलकता है. बंगाली समाज में दुर्गापूजा का स्थान खास है और खास है पूजा करने का इनका अंदाज. इसी अंदाज की झलक दिखी मेरठ के सदर दुर्गा बाड़ी में. यहां मां भगवती की स्तुति के दौरान धुनूची नृत्य देखने को मिला.

दरअसल, बंगाली परंपरा के अनुसार जब मां दुर्गा की स्तुति करते हुए आरती की जाती है, तो भक्त घुनूची नृत्य करते हैं. नृत्य करते समय नारियल के आकार के गोले में अंगार रखा जाता है. जब भक्त इस अंगार वाले पात्र को हाथ में लेकर नृत्य करते हुए विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना करते हैं तो एक अलग समां बंध जाता है. हंसी बनर्जी के मुताबिक, इस नृत्य से मां भगवती काफी प्रसन्न होती हैं और भक्त की जो भी मनोकामना होती है वह सभी पूर्ण हो जाती है.

सिंदूर खेला के साथ मां की विदाई

षप्तमी, अष्ठमी, नवमी को विधि-विधान के साथ बंगाली समाज मां दुर्गा की पूजा करता है. दशमी के दिन भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है. इस शोभायात्रा में सिंदूर खेला होता है. मान्यता है कि सिंदूर खेला के माध्यम से पति की आयु बढ़ती है. इसी वजह से बंगाली स्त्रियां सोलह शृंगार करते हुए सिंदूर खेला कर मां भगवती की विदाई करती हैं.

216 साल पुरानी परंपरा

NEWS 18 LOCAL से मोहिनी बताती हैं कि बंगाली परिवारों की 216 साल पुरानी परंपरा है ये, जिसे वे लोग आज भी निभाती आ रही हैं. शुरू-शुरू में जब यहां बंगाली परिवार आए थे, तो एक-दो बार बंगाल जाकर पूजा-अर्चना करनी पड़ी थी. लेकिन 1807 के बाद से धीरे-धीरे यहीं पर पूजा शुरू कर दी गई. तब से लेकर अब तक भव्य रूप से यहां मां भगवती की पूजा की जाती है.

जानिए क्या हैं मान्यताएं

नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना को लेकर बंगाली समाज की मान्यता है कि नवरात्र में मां भगवती अपने मायके आती हैं. ऐसे में उनका भव्य रूप से स्वागत किया जाता है. चाहे बंगाली परिवार का कोई सदस्य किसी भी प्रांत में नौकरी क्यों न कर रहा हो, लेकिन पूजा के समय सभी लोग अपने घर-परिवार के साथ उपस्थित रहते हैं.

Tags: Durga Pooja, Meerut news, UP news



Source link

more recommended stories