Dog Attack: लखनऊ के इन इलाकों में कुत्तों का है ज्यादा आतंक, यहां से सावधानी से निकलें


अंजलि सिंह राजपूत

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत कई जिलों से बच्चों और बड़ों पर लगातार कुत्तों के हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं. ऐसे में आज न्यूज़ 18 लोकल आपको बताने जा रहा है कि आखिर लखनऊ के वो कौन से इलाके हैं जहां आवारा कुत्तों का ज्यादा आतंक रहता है. जहां से गुजरते समय आपको सावधान रहने की जरूरत है, नहीं तो आप पर डॉग अटैक हो सकता है. लखनऊ के ठाकुरगंज, राजाजीपुरम की एलडीए कॉलोनी, गोमती नगर विस्तार, पीजीआई और बालागंज ऐसे इलाके हैं ज्यादा आवारा कुत्तों का झुंड आपको अक्सर सड़क पर नजर आएगा.

यही वजह है कि महीने में इन इलाकों से कुत्तों के काटने की एक से दो घटनाएं सामने आ जाती हैं. नगर निगम की ओर से ऐसे आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी की जाती है जिसके बाद उन्हें दोबारा उसी इलाके में छोड़ दिया जाता है. वर्ष 2019 से लेकर अभी तक करीब 45,000 आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी की गई है. साथ ही उनको एंटी रैबीज़ के इंजेक्शन भी दिए गए हैं. हालांकि यह आंकड़ा पूरे लखनऊ का है.

दहशत की वजह से बन रहे नए नियम
गोमती नगर विस्तार में स्थित यमुना अपार्टमेंट के वेलफेयर सोसायटी के सदस्यों ने पूरे अपार्टमेंट में नोटिस लगाया है कि कोई भी अपने कुत्ते को लिफ्ट में नहीं लेकर जाएगा. यही नहीं, कुत्ते के मुंह पर मास्क लगाकर रखना होगा और लाइसेंस के साथ एंटी रैबीज़ टीकाकरण के सर्टिफिकेट को सोसाइटी के ऑफिस में जमा करना होगा. इन सब नियमों को बनाने के बाद से जिन लोगों ने कुत्ते पाल रखे हैं वो परेशान हैं, लेकिन उन लोगों में खुशी है जिनको कुत्तों से डर लगता है.

लगातार लाइसेंस के लिए हो रहे आवेदन
बता दें कि लखनऊ समेत देश भर के अलग-अलग हिस्सों से कुत्तों के लोगों पर हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं. इसके बावजूद लखनऊ में कुत्तों को पालने के लिए लगातार आवेदन किए जा रहे हैं. नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी अभिनव वर्मा ने बताया कि 6,400 लाइसेंस नगर निगम की ओर से लोगों को कुत्ता पालने के लिए इस साल दिए जा चुके हैं. इस वर्ष सबसे ज्यादा कुत्ते पालने के लिए लोगों ने आवेदन किया है. पिछले साल 1,500 से लेकर 2,000 तक आवेदन आए थे. कुत्ता पालने के लिए लाइसेंस मांगने वालों के आवेदन अभी भी बड़ी संख्या में आ रहे हैं.

नगर निगम इस तरह कर रहा कार्रवाई
पशु कल्याण अधिकारी अभिनव वर्मा ने बताया कि शिकायत मिलने पर नगर निगम की टीम, जिसका कुत्ता है, उसके यहां जाती है और उसके सभी दस्तावेजों की जांच करती है. दस्तावेज न मिलने पर कुत्ते को जब्त कर लिया जाता है. यदि इसके बावजूद भी कुत्ते का मालिक नहीं मानता हैं तो पुलिस की सहायता ली जाती है. कुत्ता काटने पर अगर पीड़ित पक्ष की ओर से एफआईआर दर्ज कराई जाती है तो भी नगर निगम पीड़ित पक्ष का पूरा सहयोग करता है. साथ ही नगर निगम की ओर से नोटिस भी जारी की जाती है.

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