दिव्यांगों के लिए वरदान बना ये स्कूल, आत्मनिर्भर बनने के साथ ही बढ़ा रहे देश का मान, 10 ने जीता मेडल


चंदन सैनी/ मथुरा. उत्तर प्रदेश के मथुरा के वृंदावन के वात्सल्य ग्राम स्थित वैशिष्टयम दिव्यांग स्कूल इन दिनों चर्चा में है. स्कूल में दिव्यांग छात्र-छात्राओं को औद्योगिक प्रशिक्षण के साथ-साथ सिंगिंग, डांसिंग और अपने आप को किस तरह से प्रजेंट किया जाए यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है. उसी का नतीजा है कि स्कूल के 10 स्टूडेंट्स नेशनल स्तर पर अपनी प्रतिभा के दम पर गोल्ड और सिल्वर मेडल जीत चुके हैं. वहीं इस स्कूल में बच्चे कई जानी मानी कंपनियों में कार्यरत भी हैं.

वात्सल्य ग्राम स्थित दिव्यांग स्कूल की प्रिंसिपल ने जानकारी देते हुए बताया कि, 2014 में स्कूल की शुरुआत 17 बच्चों से हुई. दीदी मां साध्वी ऋतंभरा के द्वारा इस स्कूल की शुरुआत की गई थी. वहीं आज मथुरा वृंदावन के साथ-साथ देश के कई राज्यों के दिव्यांग बच्चे स्कूल में रहकर प्रशिक्षण ले रहे हैं. साथ ही ये भी बताया कि, हॉस्टल में जो बच्चे रह रहे हैं. उनमें 25 लड़के और 27 लड़कियां हैं. इन सभी को अलग अलग रखा गया है. इनका पूरा खर्च वासल ग्राम उठाता है.

नेशन लेवल के खिलाड़ी है कई स्टूडेंट्स
NEWS 18 LOCAL से बात करते हुए स्कूल प्रिंसिपल ने बताया कि, यहां पढ़ने वाले दिव्यांग छात्र-छात्राओं को औद्योगिक प्रशिक्षण के साथ-साथ खाना बनाना और अन्य मटेरियल को बनाना भी सिखाया और समझाया जाता है. बच्चों को रसोई के सामान की भी पहचान प्रशिक्षण के माध्यम से कराई जाती है. दरअसल हम लोग इन बच्चों के व्यवहार में बदलाव लाने की कोशिश हम लोग कर रहे हैं. प्रिंसिपल ने आगे बताते हुए कहा कि, हमारे स्कूल की छात्रा आयुषी शर्मा नेशनल स्तर पर खेल चुकी हैं. गोल्ड और सिल्वर मेडल भी जीता है. उन्होंने बताया कि, रोहित हॉकी नेशनल चैंपियन है. आकांक्षा और प्रणब भी नेशनल खेल चुके हैं. बच्चों को गोल्ड और सिल्वर मेडल लाते देख हमें बहुत खुशी होती है. हमारे द्वारा ट्रेंड किए हुए छात्र-छात्राएं अपने आप को आत्मनिर्भर बना रहे हैं.

खुद को आत्मनिर्भर बना रहे दिव्यांग
वहीं वृंदावन के वात्सल्य ग्राम स्थित वैशिष्टयम दिव्यांग स्कूल में दिव्यांग छात्र-छात्राओं को गाने की भी प्रैक्टिस कराई जाती है. खेलकूद की भी प्रैक्टिस के साथ-साथ बच्चे रामायण भागवत की चौपाई भी अच्छे से बोल लेते हैं. इतना ही नहीं बच्चों को कपड़े की सिलाई के साथ साथ डिस्पोजल,इयररिंग, हार और होम डेकोरेशन के सामान बनाने का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है. स्कूल प्रिंसिपल का कहना है कि, 10 बच्चों के ऊपर दो केयरटेकर रखे गए हैं, जो इनकी देखरेख करते हैं.

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