CCSU: अब बिना परीक्षा परिणाम आए भी मिलेगा दूसरी कक्षाओं में प्रवेश, जानिए क्या है यूनिवर्सिटी का प्लान


रिपोर्ट : विशाल भटनागर

मेरठ. अगर आप चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर और उससे संबद्ध कॉलेजों से विभिन्न सेमेस्टर की कक्षाओं में अध्ययन कर रहे हैं और आपने परीक्षा दे दी है. अब परीक्षा परिणाम में देरी होने के कारण परेशान हैं, तो ऐसे सभी छात्र-छात्राओं के लिए अब राहत भरी खबर है. वह छात्र-छात्राएं बिना परीक्षा परिणाम के ही नई कक्षा में आसानी से प्रवेश कर जाएंगे. जी हां, आप सोच रहे होंगे ऐसा कैसे होगा. दरअसल विश्वविद्यालय प्रशासन ने सत्र को सुचारू करने के लिए यह नया नियम लागू किया है, ताकि शैक्षिक सत्र सुधारा जा सके.

CCSU प्रेस प्रवक्ता प्रोफेसर प्रशांत कुमार ने News18 local से खास बातचीत में बताया कि छात्रों के भविष्य को देखते हुए यह फैसला किया गया है. इस फैसले से सभी कक्षाओं के सत्र समय से संचालित हो सकेंगे. उन्होंने बताया कि अगर परीक्षा में किसी विद्यार्थी का बैक भी लगता है. तो वह बैकफॉर्म भर सकता है. जिसके बाद उसे नई कक्षा में प्रवेश मिल जाएगा. अगर वह बैक परीक्षा में भी फेल हो जाता है, तो ऐसे सभी छात्र-छात्राओं को आई कार्ड सहित अन्य फीस काटकर बाकी फीस रिटर्न कर दी जाएगी. इसके बाद उन्हें पहले वाली कक्षा में अध्ययन करना होगा, जिसमें वे फेल हुए हैं.

यह रहेगा नियम

नई शिक्षा नीति-2020 (एनईपी) को छोड़कर अन्य सेमेस्टर प्रणाली के पाठ्यक्रम में छात्र पास हों या फेल- उनको दूसरे, तीसरे, चौथे, छठे, आठवें सेमेस्टर में प्रवेश देकर समय से कक्षाएं शुरू हो जाएंगी. वहीं दूसरी ओर वार्षिक प्रणाली के अंतर्गत छात्र जो बैक पेपर परीक्षा के लिए योग्य नहीं होते, उनको अगली कक्षा में प्रोन्नत नहीं किया जा सकता. ऐसे में पिछले वर्ष की परीक्षा में शामिल छात्रों को प्रोविजनल रूप से अगली कक्षा में प्रवेश मिलेगा, जो पिछली कक्षा में फेल होंगे.

हजारों विद्यार्थियों को फायदा

बताते चलें कि इससे हजारों स्टूडेंट्स को फायदा होगा. अक्सर देखा जाता है कि परीक्षाएं तो समय पर हो जाती हैं. लेकिन कॉलेज से समय से प्रैक्टिकल के नंबर नहीं आते. जिससे छात्र-छात्राओं को अगली कक्षा में प्रवेश में काफी देरी होती है. लेकिन विश्वविद्यालय के इस नियम से ऐसे सभी छात्र छात्राओं को फायदा होगा. गौरलतब है कि विश्वविद्यालय ने शैक्षिक कैलेंडर के आधार पर व्यवस्था को सुधारने के लिए 11 सदस्यों की एक समिति का गठन किया था. इसी समिति ने यह प्रस्ताव दिया था जिसे अब लागू किया गया है.

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