ब्रिटिश अफसरों ने बिना बताए किया परिसर का दौरा, छात्रों को भड़काया; इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का केंद्र को खत


हाइलाइट्स

ब्रिटिश अधिकारियों के दौरे से इलाहाबाद यूनिवर्सिटी नाराज
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को इलाहाबाद यूनिवर्सिटी ने खत लिखा है.
विश्वविद्यालय प्रशास ने आरोप लगाया कि इस दौरे के बाद परिसर में आंदोलन तेज हुए.

प्रयागराज: इलाहाबाद यूनिवर्सिटी ने केंद्र सरकार को एक खत लिखकर विश्वविद्यालय में ब्रिटिश अधिकारियों की यात्रा पर चिंता जाहिर की है और कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को इसकी खबर तक नहीं दी गई. नई दिल्ली में ब्रिटिश उच्चायोग के एक सीनियर अधिकारी के इलाहाबाद विश्वविद्यालय का दौरा करने और छात्रों से मिलने के एक हफ्ते से अधिक समय बाद इलाहाबाद यूनिवर्सिटी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया है कि ब्रिटिश उच्चायोग में कार्यरत अधिकारियों की यात्रा और उनकी छात्रों के साथ बातचीत ने परिसर में चल रहे आंदोलन को ‘तेज’ कर दिया है.

इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा कि मीडिया रिपोर्ट से विश्वविद्यालय प्रशासन को पता चला कि ब्रिटिश उच्चायोग के दो अधिकारी यूनिवर्सिटी में आए थे और कुछ तथाकथित छात्र नेताओं के माध्यम से विभिन्न विभागों में छात्रों से संपर्क किया और कुछ विवादास्पद विषयों पर छात्रों के बीच भड़काऊ बयान दिया, जिसमें छात्र संघ का मुद्दा भी शामिल है.

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आगे कहा कि इसका नतीजा यह हुआ कि छात्र फीस वृद्धि के मुद्दे पर विश्वविद्यालय और उसके आसपास आंदोलन और विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रशासन ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि उच्चायोग के इन अधिकारियों ने न तो विश्वविद्यालय के किसी अधिकारी से संपर्क किया और न ही उन्हें परिसर के अपने दौरे के बारे में सूचित किया और न ही कोई अनुमति मांगी.

दरअसल, 29 अगस्त को नई दिल्ली में ब्रिटिश उच्चायोग में राजनीतिक और द्विपक्षीय मामलों के प्रमुख रिचर्ड बार्लो और वरिष्ठ राजनीतिक आर्थिक सलाहकार भावना विज ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी परिसर का दौरा किया था. प्रयागराज की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान ब्रिटिश उच्चायोग के इन अधिकारियों ने ‘युवा भारतीयों के लिए यूके सरकार द्वारा वित्त पोषित कार्यक्रम के एक पूर्व छात्र’ के साथ अनौपचारिक बातचीत की और यूपी सरकार और जिला प्रशासन के अधिकारियों से मुलाकात की.

यूनिवर्सिटी के जनसंपर्क अधिकारी जया कपूर ने कहा कि यह एक दुखद घटना है क्योंकि विश्वविद्यालय के कुछ निश्चित प्रोटोकॉल हैं, जिनका परिसर का दौरा करते समय पालन किया जाना चाहिए था. हमें समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला कि उन्होंने स्टूडेंट्स से छात्र संघ जैसे कुछ संवेदनशील मुद्दों पर बात की. उनके दौरे के बाद फीस वृद्धि के खिलाफ विरोध तेज हो गया और इसने हमारा ध्यान खींचा. वे (ब्रिटिश राजनयिक) विश्वविद्यालय के अधिकारियों से भी नहीं मिले. केवल छात्रों के अस्थिर समूहों से मिलना ही उन्हें संदेह के घेरे में रखता है. इसलिए हमने घटना पर चिंता जताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को पत्र लिखा है.

उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इन सभी गतिविधियों को बहुत गंभीरता से लेकर इसके विषय में जिला प्रशासन से संपर्क में है और जो भी लोग दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही विश्वविद्यालय की आंतरिक सुरक्षा प्रणाली को भी सुदृढ़ किया जाएगा.

Tags: Prayagraj News, Uttar pradesh news



Source link

more recommended stories