बकरी के दूध में क्वालिटी लाने को कान्हा की नगरी में चल रहा राशिद का अभियान


नोएडा. दूध (Milk) का उत्पादन बढ़े और बच्चों-बड़ों को अच्छी क्वालिटी का दूध और दूध से बने पदार्थ खाने-पीने को मिले, इसकी दुनियाभर में फिक्र हो रही है. इसी पर चर्चा करने के लिए आज से दुनियाभर के 1500 डेयरी एक्सपर्ट (Dairy Expart) नोएडा (Noida) में जुट रहे हैं. लेकिन बकरी के दूध (Goat Milk) में क्वालिटी लाने और उसे दवाई बनाए रखने के लिए ब्रजवासी राशिद बीते 10 साल से अभियान चला रहे हैं. राशिद का यह अभियान कान्हा की नगरी मथुरा (Mathura) में चल रहा है. एक बकरी से शुरू हुआ अभियान आज 250 से 300 बकरी तक पहुंच चुका है. बकरी पालन करने वाले किसान भी राशिद के फार्म हाउस से हजारों बकरी ले जा चुके हैं.

दूध देने वाली बरबरी बकरी बचाने से जुड़ा है राशिद का अभियान

मथुरा के रहने वाले राशिद अल हक ने न्यूज18 हिंदी को बताया, “हमारे आसपास के इलाकों में खास तौर पर बकरी की दो नस्ल बरबरी और जमनापरी पाई जाती हैं. दूध और मीट के मामले में बरबरी बकरे-बकरी को बहुत अच्छा माना जाता है. लेकिन अभी तक ट्रेडीशनल तरीके से हो रहे बकरी पालन के चलते बरबरी बकरी की नस्ल पर असर पड़ने लगा है. और जब नस्ल ही खराब होने लगेगी तो इसका असर दूध और मीट दोनों पर ही पड़ेगा. बकरी का दूध दवाई माना जाता है, कई बीमारियों में बच्चों और बड़ों को खासा फायदा पहुंचाता है. बस यही सोचकर की बकरी का दूध दवाई बना रहे मैंने बरबरी बकरी का ब्रीडिंग सेंटर शुरू किया है.”

मुश्किल से बरबरी नस्ल की एक बकरी मिली थी सेंटर के लिए

राशिद ने साल 2011 में केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मथुरा बकरी पालन का कोर्स किया था. कोर्स के दौरान ही राशिद को बरबरी बकरी की नस्ल के हालात के बारे में पता लगा था. इसी के चलते 2012 में राशिद ने स्टार साइंटीफिक गोट फॉर्मिंग के नाम से अपना ब्रीडिंग सेंटर शुरू कर दिया. सेंटर तो खुल गया था लेकिन उसमे बकरी नहीं थी. क्योंकि बरबरी नस्ल की असल बकरी मिलना बहुत टेढ़ी खीर थी.

इसके लिए राशिद को बहुत भटकना पड़ा. लेकिन इतने पर भी राशिद को सिर्फ एक बकरी मिली. राशिद की लगन को देखते हुए बकरी अनुसंधान संस्थान, मथुरा ने अपने सेंटर से बरबरी नस्लीय कुछ बकरे-बकरी दिए. इसके बाद अपनी मेहनत, लगन और सब्र के दम पर राशिद ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. आज राशिद के पास 270 बकरे-बकरी हैं.

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5-6 महीने की बुकिंग पर मिलते हैं बकरे-बकरी

अगर किसी बकरी पालक को बरबरी नस्ल की बकरी और बकरा चाहिए तो उसे राशिद के सेंटर पर कम से कम 5 से 6 महीने पहले नंबर लगाना होगा. लम्बे इंतजार के बाद ही आपको असल नस्ल के बकरे-बकरी मिल पाएंगे. बरबरी नस्ल की बकरी के बच्चे पाने वालों की राशिद के पास एक लम्बी फेहरिस्त है. जागरुकता के चलते अब कोई भी बकरी पालक नस्ल से समझौता नहीं करना चाहता है. पूरे साइंटीफिक और प्राकृतिक तरीके से सेंटर चलाने वाले राशिद भी बच्चों की कितनी ही लम्बी फेहरिस्त होने पर भी इस काम में कोई चालाकी नहीं दिखाते हैं.

बकरी के दूध कारोबार में पहले नंबर पर है भारत

बकरी के दूध कारोबार में मोटे मुनाफे के चलते बकरी पालने वालों की संख्या से बढ़ रही है. देशभर में संचालित हो रहे केन्द्र सरकार के बकरी अनुसंधान केन्द्र में बकरी पालन का कोर्स करने वालों की संख्या भी बढ़ रही है. बकरे-बकरियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है. साल 2012 की पशु जनगणना के मुताबिक देश में बकरियों की संख्या 135.17 मिलियन थी. वहीं जब 2019 में जनगणना हुई तो यह संख्या बढ़कर 149 मिलियन पर पहुंच गई.

भारत का बकरी के दूध का कारोबार विश्व में पहले नंबर पर है. देश में बकरी का पाश्चराइज्ड दूध 200 ग्राम की बंद बोतल में 35 से 40 रुपये का बिक रहा है. अभी अमूल, मदर डेयरी समेत और बड़ी कंपनियों ने बकरी के दूध कारोबार में कदम नहीं रखें हैं, लेकिन जिस दिन ऐसा हुआ तो यह कारोबार नई ऊंचाईयों को छुएगा.

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