बेहद शुभ है इंदिरा एकादशी, अगर नहीं कर पाए हैं पितृ पक्ष में श्राद्ध तो जरूर रखें यह व्रत


सर्वेश श्रीवास्तव

अयोध्या. सनातन धर्म में एकादशी का विशेष महत्व होता है. साल के 12 माह प्रत्येक महीने में दो बार एकादशी पड़ती है. पितृ पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के मुताबिक इंदिरा एकादशी का बड़ा महत्व होता है. इस बार इंदिरा एकादशी 21 सितंबर को है. इतना ही नहीं इंदिरा एकादशी का व्रत अन्य एकादशी के व्रत की तुलना में बेहद खास होता है.

न्यूज़ 18 लोकल से बात करते हुए ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम ने कहा कि सनातन धर्म के लोग किसी भी कारणवश पितृपक्ष में श्राद्ध तर्पण जब नहीं कर पाते हैं तो उनके लिए ईश्वर ने एक अद्भुत और दिव्य व्यवस्था कर रखी है. पितृ पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी कहते हैं. एकादशी का व्रत करने से पितरों को उत्तम गति की प्राप्ति होती है.

जानिए कब है शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम बताते हैं कि हिंदू पंचांग के अनुसार इंदिरा एकादशी 20 सितंबर के दिन मंगलवार को सुबह नौ बजकर 26 मिनट से शुरू होकर 21 सितंबर दिन बुधवार को 11 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगा. इंदिरा एकादशी का व्रत 21 सितंबर को रखा जाएगा और 22 सितंबर को उसका पारन करना है. सुबह छह बजकर नौ मिनट से लेकर रात्रि आठ बजकर 35 मिनट तक पारन किया जा सकेगा.

क्या है इंदिरा एकादशी का महत्व
उन्होंने कहा कि इंदिरा एकादशी में भगवान विष्णु का पूजा विधि-विधान पूर्वक करना चाहिए. इंदिरा एकादशी का व्रत करने का फल पितरों के श्राद्ध करने के फल के बराबर होता है. सारे एकादशी में इंदिरा एकादशी का व्रत बहुत महत्वपूर्ण है.

(नोट- यहां दी गई जानकारी मान्यताओं पर आधारित है NEWS 18 LOCAL इसकी पुष्टि नहीं करता है)

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