Basti News: काले नमक की खेती बस्ती के किसानों के लिए साबित होगी वरदान, जानिए कैसे?


कालानमक धान की गुणवत्ता और खुशबू के लिए प्रसिद्ध बस्ती जनपद भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के प्रयासों से अब एक और नई कीर्तिमान स्थापित करने जा रहा है, बस्ती जनपद के कृषि विज्ञान केंद्र बंजारिया में डेवलप की जा रही कालानमक धान की नई प्रजाति पूसा 1638 एवम एसएल 03 अब किसानों के लिए वरदान साबित होंगी, इस नई प्रजाति के कालानमक धान का उपयोग करके किसान जहां उच्च कोटि के गुणवत्ता वाला काला नमक धान का फसल पैदा कर सकेगें वही उनकी पैदावार में भी वृद्धि होगी जिससे उनकी आय भी बढ़ जाएगी, वही बस्ती जिला प्रशासन काला नमक धान को एक जिला एक उत्पादन में भी शामिल करने जा रहा है,

किसानों को किया जाएगा प्रोत्साहित
जिला कृषि अधिकारी मनीष सिंह ने बताया चूकी बस्ती की पहचान ही काला नमक से है तो अब इसको बृहद स्तर पर बढ़ाने के लिए किसानों को जागरूक किया जाएगा, जगह जगह कैम्प लगाकर किसानों को काला नमक का अधिक से अधिक उत्पादन करने पर जोर दिया जा रहा है इसके लिए हम लोगों द्वारा किसानों को सब्सिडी भी दी जाएगी, चूकी बस्ती के काला नमक चावल का डिमांड पूरे देश में रहता है इसलिए अब काला नमक को कॉमर्शियल खेती के रूप में विकसित किया जाएगा, काला नमक धान को तकनीकी खेती के रूप में विकसित करके इसके क्षेत्रफल में भी वृद्धि की जाएगी,

किसानों को भी मिलेगा फायदा
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की सहायता से बस्ती के बंजारिया फर्म द्वारा डेवलप किया गया काला नमक धान की नई प्रजाति पूसा 1638 व एसएल 03 किसानों के लिए वरदान साबित होगा, पहले जहा किसान काला नमक की खेती इसलिए नही करना चाहते थे क्योंकि इसका उत्पादन अन्य धान के कंपेयर में बहुत कम होता था लेकिन अब काला नमक धान के इस नई प्रजाति का इस्तेमाल करके किसान प्रति हेक्टर 40-45 कुंटल धान पैदा कर सकेगें, चूकीं काला नमक धान अन्य धान की तुलना में अधिक दाम में भी बिकता है लिजहा अब किसान काला नमक की खेती करके अपनी आय भी बढ़ा सकेंगे, काला नमक धान की ये नई प्रजाति झुलसा रोग प्रतिरोधी भी है जिससे फसलों को कोई नुक्सान भी नहीं हो पाएगा, जिससे पैदावार भी बेहतर हो सकेगा,

वही नौकरी छोड़कर कालानमक धान की खेती करने वाले किसान विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि वो जब मुम्बई बैंगलोर आदि शहरों में नौकरी करते थे तो दुकानदारों द्वारा पूर्वांचल का शुद्ध काला नमक के नाम पर चावल का अधिक पैसा कस्टमर से लिया जाता था और सब लोग पूर्वांचल के काला नमक चावल को खूब खरीदते भी थे इसलिए मैं नौकरी छोड़कर गांव आ गया और काला नमक की खेती करने लगा जिससे अब हमको बाहर जाकर नौकरी की जरूरत नहीं पड़ती है, वही काला नमक की नई प्रजाति से मेरा आय भी दुगना हो जाएगा,

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