Bareilly: बरेली सेंट्रल जेल में बंद थे देश के पहले प्रधानमंत्री, जानिए नेहरू के जेल के किस्से


रिपोर्ट – अंश कुमार माथुर

बरेली: जवाहर लाल नेहरू जब तक जिंदा थे. बहुत बड़े जननेता थे. उनकी लोकप्रियता ऐसी थी कि आप शायद कल्पना भी न कर सकें. विदेशों में भी नेहरू की बहुत धाक थी.भारत देश के पहले प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी संभालने वाले पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश की आजादी के लिए अंग्रेजों से कड़ा मुकाबला किया था. 14 नवंबर 1889 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (प्रयागराज) में जन्में पंडित जवाहरलाल नेहरू अपने छात्र जीवन से ही विदेशी हुकूमतों के अधीन देशों के स्वतंत्रता संघर्षों में रुचि रखते थे. जिसके चलते उन्हें अपने जीवन काल में 9 बार जेल की सजा भी काटनी पड़ी. आजादी की इस लड़ाई के दौरान पंडित जवाहरलाल नेहरू ने बरेली के केंद्रीय कारागार में भी करीब 6 माह की सजा काटी थी. उस वक्त उन्हें अंग्रेजी हुकूमत ने खुब यातनाएं भी दी.

बरेली कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष के वरिष्ठ इतिहासकार एस. के. मेहरोत्रा बताते है. जवाहरलाल नेहरू ने बरेली के जेल में 6 महीने का समय बिताया. यही कारण है कि बरेलीवासी उनको याद भी करते है. उनहोंने आगे बताया की नेहरूजी आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने. जिसके बाद उन्होंने ही देश में नदियों पर बांध की योजना की शुरुआत की थी. उनके द्वारा ही देश को पंचवर्षीय योजना प्रदान की गई. जिसके तहत कृषि और फिर उद्योगों के विकास के लिए उनके कार्यकाल को आज भी याद किया जाता है.

देश की आजादी की लड़ाई के वक्त पंडित जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ डिफेंस ऑफ इंडिया रेगुलेशन एक्ट 1915 के उल्लंघन का मुकदमा दर्ज हुआ था. जिसके बाद उन्हें अहमदनगर फोर्ट से 31 मार्च 1945 को केंद्रीय कारागार बरेली में कैदी नंबर 582 के रूप में गढ्डा बैरक की ए श्रेणी में रखा गया.

बरेली केंद्रीय कारागार में पंडित नेहरू के साथ यूपी के पहले मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत भी जेल में बंद रहे थे और उस समय केंद्रीय कारागार में 592 अन्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को भी कैद रखा गया था. बरेली केंद्रीय कारागार में उस समय के अंग्रेज सिपाहियों के द्वारा लिखे दस्तावेजों के अनुसार जेल में पंडित नेहरू के ब्यौरे में उनकी उम्र 42 वर्ष, वजन 126 पाउंड और लंबाई 5 फुट साढ़े छह इंच लिखी गई थी.

सजा के दौरान पंडित नेहरू ने चलाया था चरखा

केंद्रीय कारागार का भवन आज भी क्रांतिकारियों की इन यादों को संजोए रखा है. देश के आजादी की लड़ाई के वक्त पंडित जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ डिफेंस ऑफ इंडिया रेगुलेशन एक्ट 1915 के उल्लंघन में सजा दी गई. जिसमें बरेली कारागार में रहने के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री ने गांधी चरखा चलाकर सूत की कताई भी की थी. उस समय अंग्रेज सिपाहियों ने उनसे कड़ा श्रम भी करवाया था.

10 जून 1945 को अल्मोड़ा भेज दिया गया

अहमदनगर फोर्ट से 31 मार्च 1945 को बरेली सेंट्रल जेल में शिफ्ट होने के बाद. कैदी नंबर 582 के रूप में बरेली की जेल बैरक में रहने वाले नेहरू को सजा काटने के बाद 10 जून 1945 को अल्मोड़ा की जिला कारागार भेज दिया गया था. उसके कुछ दिनों बाद उनकी रिहाई हुई और उनकी रिहाई के दो वर्ष बाद देश को आजादी मिली. पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी आत्मकथा ‘मेरी कहानी’ में बरेली केंद्रीय कारागार के दिनों का जिक्र किया है.

पंडित नेहरू को अंग्रेजी हुकूमत ने भेजा जेल

देश के बैरिस्टर रहे पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जमीदार परिवार से थे. खानदानी रहीश होने के बाद भी पंडित नेहरू ने देश की आजादी के लिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जंग-ए-आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई. वह सबसे पहले 1922 में जेल गए. अपने जीवन काल में वह नौ बार जेल जाने के बाद, अंतिम बार 1945 में देहरादून जेल से रिहा हुए थे.

अब जेल बंदियों को दे रही प्रेरणा

बरेली केंद्रीय कारागार के जेलर कमलेंद्र सिंह बताते है कि अब केंद्रीय कारागार बरेली की इस बैरक को नेहरू बैरक के नाम से जाना जाता है. अब कारागार में कारावास की सजा काट रहे बंदियों को नेहरू बैरक के माध्यम से अच्छाई की ओर प्रेरित करने वाले संस्करण दिखाए जाते हैं.

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