बाघ और इंसान के बीच खूनी जंग: 30 मिनट की लड़ाई के बाद शख्स की हुई जीत

रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी और पीलीभीत जिलों में पिछले कुछ सालों में बाघ के हमले की घटनाएं काफी बढ़ी हैं. साल 2018 में बाघ के हमलों में कम से कम 22 ग्रामीणों की मौत हुई. लखीमपुर खीरी में गन्ने के खेतों में बाघों के बसेरा बनाने से खतरा बढ़ा है और लगभग एक दर्जन बाघों ने लोगों को निशाना बनाया है. जून 2014 में पीलीभीत के पास एक बाघ अभयारण्य शुरू किया गया था, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने दावा किया कि तब से उनके जीवन में काफी बदलाव आया है. उनका कहना है कि कुछ जगहों पर रिजर्व और आस-पास के खेतों के बीच बफर सिर्फ 30 फीट है. ज्यादातर ग्रामीण इतने गरीब हैं कि बाड़ लगाने में सक्षम नहीं हैं और इस कारण जीवन पर खतरा बढ़ गया है.

बाघ ने खराब किया पूरा चेहरा

बांग्लादेश के रहने वाले हशमोट अली पर अगस्त 2016 में बाघ ने हमला किया था और इस वजह से उनका चेहरा पूरी तरह खराब हो गया. हशमोट जब जंगल में नहर के बाद अपनी नाव पर सो रहे थे, तब बाघ ने पंजे से हमला किया और एक ही झटके में चेहरे के आधे हिस्से को अलग कर दिया. हशमोट की चीख सुनकर आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाया और बाघ भाग गया. हालांकि हशमोट को जंगल से अस्पताल ले जाने में करीब छह घंटे लग गए और इस कारण डॉक्टरों ने उनकी जान तो बचा ली, लेकिन चेहरा ठीक नहीं हो पाया।
भारत के कॉर्बेट के पास बारापुर गांव में नवंबर 2015 में एक मजदूर किसान अपने जानवरों को चराने के लिए जा रहा था, तभी बाघ ने उसपर हमला कर दिया. इसके बाद शख्स अपना भाला पकड़ने में कामयाब रहा और बाघ से लड़ने की कोशिश की. 30 मिनट की लड़ाई में वह आदमी बुरी तरह घायल हो गया था और उसने अपना एक हाथ व एक पैर खो दिया. गंभीर चोट और खून से लथपथ होने के बावजूद उसने हार नहीं मानी और बाघ को मार डाला।

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