Agra University News: बीएचएमएस थर्ड ईयर के 70 प्रतिशत छात्र फेल, विश्वविद्यालय ने बताई चौंकाने वाली वजह


आगरा. ताज नगरी आगरा के डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर विश्विद्यालय द्वारा बीएचएमएस के तृतीय वर्ष की परीक्षा का परिणाम सात जुलाई को घोषित किया गया था, जिसमें लगभग 70 प्रतिशत छात्र फेल हो गए. एलबीएस होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की प्रधानाचार्य हेमलता ने आगरा विश्वविद्यालय पर आरोप लगाया था कि गाइडलाइन के अनुसार जो परीक्षक प्रश्न पत्र बनाता है, उनकी उपस्थिति में ही कॉपियों का मूल्यांकन होता है, लेकिन आगरा विश्वविद्यालय ने दूसरे राज्यों के प्राइवेट कॉलेज से परीक्षक नियुक्त कर मूल्यांकन कराया है. इसमें पूरी तरह से धांधली हुई है, जिसके कारण छात्र फेल हुए है.

वहीं, इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय ने भी अपना पक्ष रखा है. विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि हमारे ऊपर जो आरोप लगाए जा रहे है, वह सरासर गलत है. हमने गाइडलाइन के अनुसार ही कॉपियां चेक करवाई है.

पूरे प्रदेश में है 11 कॉलेज
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर विश्विद्यालय के रजिस्ट्रार ओम प्रकाश ने बताया कि पूरे प्रदेश में बीएचएमएस के कुल 11 कॉलेज है, जिसमें से 9 सरकारी है और 2 सेल्फ फाइनेंस है. इनका इवेलुलेशन सेंट्रलाइज हुआ, जो कि यूनिवर्सिटी के खंदारी कैम्पस में हुआ था. मूल्यांकन के काम में लगभग 90 प्रतिशत शिक्षक शामिल थे. कॉपियां जो चेक की गई वो कोडिंग और डी कोडिंग के हिसाब से चेक की ग, जिसमें किसी को यह पता ही नहीं रहता है कि यह किस छात्र और कौन से कॉलेज की कॉपी है. हमारे ऊपर जो आरोप लगाया गया है, वह गलत लगाया जा रहा है.

हमेशा नियमानुसार जांचवाई गई है कापियां
प्रो कुलपति विजय तनेजा ने बताया कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर विश्विद्यालय के द्वारा हमेशा किसी भी विषय की कापियां नियमनुसार ही जंचवाई जाती रही है. बीएचएमएस में जो आरोप लगाए जा रहे है, वो झूठे है. जिन टीचरों ने कापियां जांची थी, ज्यादातर एडेड कॉलेज के ही थे. उन सभी टीचरों को बहुत लंबा एक्सपीरियंस भी है, चाहे वह सेल्फ फाइनेंस या फिर एडेड का टीचर हो, अगर उनको तीन साल का एक्सपीरियंस है तो वह भी यूनिवर्सिटी अप्रूव्ड है. उन्हें अधिकार है कॉपियां जांचने का. उन्हीं टीचरों के द्वारा कॉपियां जंचवाई गई है.

बच्चो के हित में उठाएंगे कदम
प्रो कुलपति विजय तनेजा ने बताया कि छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए हम लगातार कदम उठाते रहे है. हम नहीं चाहते कि किसी भी छात्र को परेशानी का सामना करना पड़े. अगर किसी बच्चे को लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है तो वह आरटीआई के तहत कॉपियों को देख सकता है. उन्हें चैक कर सकता है, टोटलिंग कर सकता हैं अगर टोटलिंग में गलती है तो स्क्रूटनी के माध्यम से दूर की जाएगी. अगर छात्र चाहते है कि उसकी कॉपियां गलत जांची गई है, मार्क्स कम है तो वह चैलेंज इवेल्यूएशन के जरिए दोबारा से कॉपियां जांच करके मार्क्स दिए जायेंगे.

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