आखिर क्यों अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं शिवपाल सिंह? समर्थकों को अब रास नहीं आ रही है उनकी चुप्पी

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इटावा. समाजवादी पार्टी प्रमुख और अपने भतीजे अखिलेश यादव से नाराज चल रहे पीएसपीएल के प्रमुख शिवपाल सिंह यादव के बीजेपी में शामिल होने की चर्चा काफी दिनों से चल रही है. लेकिन फिलहाल तक वे अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं. न शिवपाल की ओर से और न ही बीजेपी की ओर से इस संबंध में कोई तारीख या फिर कोई और जानकारी दी गई है. वहीं शुक्रवार को शिवपाल सिंह यादव ने अपना संगठन पूरी तरह से बंद कर दिया. उसके बाद वे लखनऊ से अपने गृह जिला इटावा देर शाम पहुंच गए हैं. उनके पहुंचने की सूचना पहले ही स्थानीय मीडिया को हो गई थी जिस कारण मीडिया उनके घर के बाहर जमा हो गई. जब शिवपाल सिंह यादव पहुंचे तो उन्होंने खुद ही पत्रकारों से उल्टा सवाल दाग दिया कि यहां क्या कर रहे हो किसान परेशान हैं, बेहाल हैं, उनके पास जाकर मदद करने का काम करो.

इस दौरान पत्रकारों ने भी शिवपाल सिंह यादव से कई सवाल किए लेकिन उन्होंने किसी भी सवाल का सही जवाब देना मुनासिब नहीं समझा. बताते चलें की राजधानी लखनऊ में 26 मार्च को हुई समाजवादी पार्टी की बैठक में न बुलाए जाने को लेकर के खफा शिवपाल सिंह यादव ने अखिलेश यादव की कार्यशैली को लेकर के कई और सवाल खड़े कर रखे हैं और इन्हीं सवालों के बीच 9 अप्रैल को एमएलसी चुनाव के मतदान के समय सैफई में शिवपाल सिंह यादव ने यह कह कर के सनसनी पैदा कर दी कि उन्होंने जिस को भी वोट दिया है जीत उसी की होगी. इससे पहले शिवपाल सिंह यादव की उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई मुलाकात के बाद उनके भाजपा में जाने की चर्चाएं लगातार बनी हुई हैं. शिवपाल सिंह यादव के भाजपा में जाने की चर्चाओं के बीच 8 अप्रैल को उनके बड़े भाई समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव भी इटावा पहुंचे थे लेकिन शिवपाल सिंह यादव ने उनसे मुलाकात करने की कोई जरूरत नहीं समझी.

समर्थक बेचैन
भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर सपा प्रमुख अखिलेश के चाचा शिवपाल की चुप्पी उनके ही समर्थकों को अब रास नही आ रही है. शिवपाल समर्थक दबी जुबान से अब इस बात बोलने मे जुट गए हैं कि फिलहाल शिवपाल के भाजपा के जरिये अच्छे दिन आने वाले नहीं हैं. उनके आगे पीछे चलने वाले कर्मठ समर्थक शिवपाल सिंह यादव की चुप्पी पर हैरत महसूस कर रहे हैं लेकिन कोई भी कुछ समझ नहीं पा रहा है कि आखिरकार देश भर मे शिवपाल के भाजपा मे शामिल होने की चर्चाएं लगातार उड़ रही हैं उसके बावजूद भी शिवपाल की ओर से न तो इंकार किया जा रहा है और न ही भाजपा मे शामिल होने की तस्दीक ही की जा रही है . लंबे समय से चर्चा चल रही है कि बीजेपी उन्हें विधानसभा के डिप्टी स्पीकर के पद से नवाज सकती है. अटकलों का बाजार गर्म है कि शिवपाल बीजेपी के सम्पर्क में हैं और डिप्टी स्पीकर बनने के लिए तैयार भी हैं. लेकिन वे बीजेपी में कब जाएंगे इस सवाल को लगातार टाल रहे हैं. इस पर वह इतना ही कहते हैं कि अभी उचित समय नहीं है. उचित समय पर बताएंगे.

इनकार नहीं लेकिन…
जाहिर है, शिवपाल बीजेपी में जाने से इनकार नहीं कर रहे हैं. पिछले दिनों ट्विटर पर पीएम मोदी को फॉलो कर और सीएम योगी से मुलाकात कर उन्होंने इसके संकेत भी दिए लेकिन बीजेपी है कि खुलकर अब तक कुछ भी कहने से बच रही है. उल्टे डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने तो यह कहकर शिवपाल की उम्मीदों को एक तरह से पलीता ही लगा दिया कि-बीजेपी में अभी कोई वेकेंसी नहीं है. इस बीच खबर आई है शिवपाल जल्द ही अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन कर सकते हैं. इन दिनों वह पूरी तरह राममय नजर आ रहे हैं लेकिन फिर भी बीजेपी में औपचारिक एंट्री पर तस्वीर अभी साफ नहीं हो पा रही है. शिवपाल का भाजपा में जाना उत्तर प्रदेश की सियासत में किसके लिए फायदेमंद होगा और किसके लिए नुकसानदेह इसका पता तो समय पर ही चलेगा लेकिन फिलहाल भाजपा भी हर तरफ से आश्वस्त होकर ही इस बारे में कोई फैसला लेना चाहती है.

तो क्या ताकत आजमा रही बीजेपी
राजनीतिक जानकारों के बीच कहा जाने लगा है कि बीजेपी पहले शिवपाल की ताकत को आजमायेगी. यह पता लगाएगी कि शिवपाल के साथ समाजवादी पार्टी का बेस वोट बैंक किस सीमा तक बीजेपी में आने के लिए तैयार है. सपा मुखिया अखिलेश यादव के इस्तीफे (करहल से विधायक का चुनाव जीतने के बाद) से खाली हुई आजमगढ़ लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में इसका अंदाज लग सकता है. शिवपाल सिंह यादव यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के बाद एक बार फिर अपने भतीजे अखिलेश यादव से तब नाराज हो गए जब अखिलेश ने उन्हें समाजवादी पार्टी विधायकों की बैठक में नहीं बुलाया. अखिलेश ने साफ तौर पर संकेत दिया कि शिवपाल चुनाव भले सपा के टिकट पर जीते हों लेकिन वह उन्हें सहयोगी दल के तौर पर ही मान कर चल रहे हैं. अखिेलेश के इस रुख से नाराज शिवपाल उनके द्वारा बुलाई सहयोगी दलों की बैठक में शामिल होने की बजाए सपा संरक्षक और अपने बड़े भाई मुलायम सिंह यादव से मिलने दिल्ली चले गए थे. दिल्ली से लौटकर शिवपाल ने बीजेपी से करीबी के स्पष्ट संकेत दिए. सीएम योगी से मुलाकात से लेकर पीएम मोदी को ट्विटर पर फॉलो करने और फिर राम दरबार की फोटो शेयर करने तक शिवपाल के संकेतों को इसी रूप में देखा गया.

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