आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव: बीजेपी ने जीत के लिए झोंकी ताकत, सपा-बसपा ने भी बनाई रणनीति


आजमगढ़. आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव की बिसात बिछ चुकी है. कांग्रेस उपचुनाव नहीं लड़ रही, लेकिन सपा-बसपा और बीजेपी पूरी ताकत के साथ मैदान में है. इसके अलावा 10 और प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं. फैसला 26 जून को होगा कि बाजी किसके हाथ लगी, लेकिन बीजेपी सपा के किले को ढहाने के लिए बड़ी रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है. उधर विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद सपा के रणनीतिकार हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं. वहीं बसपा भी पूरी ताकत के साथ मैदान में नजर आ रही है. देखना दिलचस्प होेगा कि किसका दांव कितना कारगर होता है.

बता दें कि वर्ष 2019 में सपा मुखिया अखिलेश यादव आजमगढ़ सीट से सांसद चुने गए थे. विधानसभा चुनाव में जिले की सभी दस सीटों पर सपा को जीत मिली. इसके बाद अखिलेश यादव ने लोकसभा से त्यागपत्र दे दिया, जिसके बाद यहां उपचुनाव हो रहा है. गौर करें तो चाहे मोदी लहर हो अथवा योगी लहर कभी भी आजमगढ़ में बीजेपी अच्छा नहीं कर पाई. हमेशा सपा ने यहां अच्छा किया. दूसरे नंबर पर बसपा रही. अब उपचुनाव में सपा अपने किले को बचाने की जद्दोजहद में जुटी है. यही वजह है कि सपा ने पहले सुशील आनंद को टिकट दिया, लेकिन जब लगा कि सुशील चुनाव हार सकते हैं तो अखिलेश यादव ने अपने चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव को मैदान में उतार दिया.

बूथ साधने में आगे दिख रही बीजेपी

बसपा से गुड्डू जमाली ताल ठोक रहे हैं. बीजेपी से भोजपुरी कलाकार दिनेश लाल यादव निरहुआ चुनाव मैदान में हैं. सपा ने चुनाव में प्रचार के लिए पूरी फौज उतार दी है, तो बीजेपी भी पीछे नजर नहीं आ रही है. रहा सवाल बूथ साधने की तो बीजेपी सपा-बसपा से कई कदम आगे दिख रही है. बीजेपी की ओर से 311 शक्ति केंद्रों पर महिला, युवा, किसान, अल्पसंख्यक मोर्चा सम्मेलन कर वोटरों में ऊर्जा भर रही है. विभिन्न प्रकोष्ठों की जमीनी रिपोर्ट पर वोटरों तक दिग्गज पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. संसदीय क्षेत्र के 10 लाख मतदाताओं तक पहुंचने की तैयारी हो रही है. बीजेपी एक-एक बूथ जीतने को चक्रव्यूह तैयार की है. कुछ ऐसा कि एक-एक व्यक्ति की नाराजगी को न सिर्फ जानेगी, बल्कि उन्हें मनाने उनके यहां अपनो को भेजेगी. रणनीति को जमीन पर उतारने के लिए 22 मंडलों के आठ-आठ बूथों के 311 शक्ति केंद्रों में विभाजित कर सम्मेलन कराए जा रहे हैं.

सपा ने भी झोंकी ताकत

वहीं सपा की बात करें तो पार्टी के नेता चुनावी जनसंपर्क, लाव-लश्कर के साथ साईकिल को चलाने में जुटे हैं. सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव का कहना है कि विभिन्न प्रकोष्ठों के कार्यकर्ता 10 लाख वोटरों तक पहुंच जीत की नींव रखेंगे. सपा के दसों विधायक,अनुषांगिक संगठनों में युवा, महिला, पिछड़ा, अनुसूचित जनजाति, किसान, अल्पसंख्यक मोर्चा की अलग-अलग टीम हैं. मंडल और सेक्टर स्तर पर गठित हमारी ये टीम आठ-आठ बूथों के एक शक्ति केंद्र पर अलग-अलग सात सम्मेलन कर रही है, जिसमें प्रकोष्ठों के अलग-अलग सदस्य पहुंच रहे हैं. उन्होंने कहा कि एक-एक बूथ के मतदाताओं पर हमारा सात स्तरीय कमांड होगा, जिसे तोड़ना दूसरे किसी के वश में नहीं.

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