आजादी का अमृत महोत्सव: मेरठ में शुरू होने जा रही है 5 हजार साल पुरानी परंपरा, 15 अगस्त को होगा शुभारंभ


रिपोर्ट- विशाल भटनागर
मेरठ: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर 15 अगस्त के दिन पूरा देश आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अमृत महोत्सव मनाने जा रहा है. अमृत महोत्सव को ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए मेरठ जिला 5 हजार वर्ष पूर्व मनाई जाने वाली एक अलौकिक परंपरा को फिर से जीवंत और अद्भुत रूप देने की तैयारियों में जुटा हुआ है. तो चलिए बताते हैं कि क्या थी वह परंपरा और क्या है शासन-प्रशासन की तैयारी?

जानिए क्या थी महाभारत काल में परंपरा ?
हमारी हर एक परंपरा और मान्यता का संबंध मां गंगा से सीधे जुड़ाव रखता है. कहा जाता है कि ऐतिहासिक महाभारत कालीन हस्तिनापुर में 5 हजार साल पहले मां गंगा की आरती हुआ करती थी. जो हजारों वर्ष पहले ही या तो समाप्त हो गई या फिर रुकवा दी गई. जिसे मेरठ जिला प्रशासन फिर से शुरू करने जा रहा है. इसके शुभारंभ का शुभ दिन 15 अगस्त और स्थान प्रेम फतेहपुर घाट को रखा चुना गया है. इतना ही नहीं, शुभारंभ होने के बाद निरंतर हरिद्वार, बनारस की तर्ज पर प्रतिदिन यहां शाम के समय गंगा आरती का आयोजन किया जाएगा.

एक विशेष घाट का होगा निर्माण
मवाना एसडीएम अखिलेश यादव ने बताया कि अभी वैकल्पिक व्यवस्था के तौर फतेहपुर प्रेम में शाम 5:30 बजे आरती का आयोजन किया जाएगा. लेकिन गंगा जी के घाट पर ही एक विशेष घाट का निर्माण होगा. जिसे देश के काशी और हरिद्वार के घाटों की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. यहां होने वाली आरती का समय और क्रम भी ठीक वैसे ही होगा, जैसे हरिद्वार और बनारस में होता है. भविष्य में भी निरंतर इस आरती का आयोजन होता रहेगा.

गंगा के बीचों-बीच होगा दीपदान
नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट के अध्यक्ष व शोभित विवि के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती चिकारा ने बताया कि गंगा आरती से पहले दीपदान की योजना बनाई गई है. इसके लिए नाव के सहारे बीच नदी में पहुंचा जाएगा और फिर दीपदान किया जाएगा. आयोजन पूरी पारंपारिक वेशभूषा में ही होगा.

सवा लाख दीपों से होगी गंगा आरती
आरती और अनुष्ठान के लिए कर्ण मंदिर के महंत शंकर देव जी को बुलाया जाएगा. सबसे पहले मां गंगा का विधि विधान के साथ पूजन और फिर 251 दीपों का दीपदान किया जाएगा. उसके बाद सवा लाख दीपों से गंगा आरती होगी. वहीं किसी तरह की कोई अनहोनी ना हो इसके लिए नाव और नाविकों की व्यवस्था होगी. साथ ही साथ गोताखोर भी बुलाए जाएंगे. शासन-प्रशासन का मामना है कि घाट के विकास के साथ-साथ इस तरह के आयोजन से देश के अन्य धार्मिक पर्यटन क्षेत्र की तरह इस क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा, विकास के पंख खुलेंगे.

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