आ गई श्रीमद्भागवत गीता की डिजिटल किताब: जानें क्या है इसकी खासियत


प्रयागराज. श्रीमद्भागवत गीता हिंदुओं का पवित्र धार्मिक ग्रंथ है. महाभारत के युद्ध के समय भगवान कृष्ण ने अर्जुन को जो उपदेश दिया था, गीता के 18 अध्यायों में वह संकलित है. श्रीमद्भागवत गीता को पढ़ने और उससे ज्ञानार्जन करने वाले देश और दुनिया के कोने कोने में मिल जाएंगे, लेकिन समय के साथ ही अब श्रीमद् भागवत गीता का भी स्वरूप बदल रहा है. धर्म और अध्यात्म की यह पुस्तक अब डिजिटल फार्म में सामने आ गई है. यानी अध्यात्म और तकनीक के जरिए अब डिजिटल श्रीमद्भागवत गीता तैयार की गई है, जिसे आप पढ़ने के साथ ही सुन भी सकते हैं. इसके साथ ही श्लोकों का अनुवाद भी सुनकर समझ सकते हैं.

हालांकि बहुत से लोगों को इस डिजिटल पुस्तक को देखकर आश्चर्य होगा, लेकिन यह बात सच है कि डिजिटल गीता के प्रत्येक पेज पर सेंसर लगा है. एक पेन की तरह दिखने वाले मल्टीमीडिया प्रिंट रीडर को जिस चित्र पर रखेंगे वह बजने लगता है. उसके बारे में जानकारी देता है. संस्कृत के श्लोक को भावार्थ के साथ बताता है. इस डिजिटल श्रीमद्भागवत गीता को प्रधान डाकघर में कार्य करने वाले राजेश वर्मा ने साढ़े 11 हजार में खरीदा है.

16 भाषाओं में श्लोकों का अर्थ समझाती है डिजिटल गीता
राजेश वर्मा ने बताया कि श्रीमद्भागवत गीता को डिजिटल फॉर्म में 16 भाषाओं में सुना जा सकता है. इनमें हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, नेपाली, तमिल, उड़िया, कन्नड, पंजाबी, बंग्ला, असमिया और गुजराती भाषाएं शामिल हैं. इसके साथ ही इसमें 108 भजनों का भी संकलन है, जिसे सुनते ही लोग भक्ति भाव में डूब जाते हैं. डाक कर्मी राजेश वर्मा ने इस पुस्तक को अपने घर के लिए खरीदा था, लेकिन मौजूदा समय में उन्होंने इस पुस्तक को डाक विभाग के कर्मचारी संघ के कमरे में ही रखा है और लंच के समय में सब कर्मचारी यहां इकट्ठा होते हैं. करीब आधे घंटे तक श्रीमद्भागवत गीता का श्रवण करते हैं. राजेश के मुताबिक गीता के श्लोक को सुनकर उन्हें नई ऊर्जा मिलती है. तनाव दूर होता है और अपने कर्म को करने की प्रेरणा मिलती है.

मुस्लिम भी सुन रहे हैं गीता के उपदेश
ऐसा नहीं है कि सिर्फ डाक विभाग में काम करने वाले हिंदू कर्मचारी ही श्रीमद्भागवत गीता को सुनते हैं, बल्कि यहां पर जो मुस्लिम कर्मचारी भी हैं वह भी भगवान कृष्ण के बताए गए उपदेशों को सुनकर इसका आध्यात्मिक ज्ञान लेते हैं. मुस्लिम कर्मचारी एम गुलरेज के मुताबिक श्रीमद्भागवत गीता का डिजिटल वर्जन अपने आप में अनूठा है. इस पुस्तक को अशिक्षित के साथ ही साथ अगर दृष्टिबाधित व्यक्ति है तो वह भी सुन सकता है.

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