2024 की तैयारियों को लेकर मिशन मोड में बीजेपी, बूथों के मैनेजमेंट पर शुरू हुआ काम


गोरखपुर. चुनावों में लगातार मिल रही जीत को भले ही विपक्षी कुछ और रंग देने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन बीजेपी हर चुनाव को मिशन मोड में लड़ती है और चुनाव की तैयारी बहुत पहले से ही शुरू कर देती है. 2024 के चुनाव में भले ही अभी करीब 20 महीने का वक्त है, लेकिन बीजेपी ने लोकसभा चुनाव फतह करने के लिए अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं. ‘बूथ जीतो चुनाव जीतो के मंत्र’ पर काम करते हुए बेहद कमजोर बूथों पर बीजेपी के कार्यकर्ता काम कर रहे हैं.

बीजेपी के चाण्क्य कहे जाने वाले गृहमंत्री अमित शाह ने चुनाव जीतने के लिए नारा दिया था कि बूथ जीतो चुनाव जीतो, और इसी नारे पर काम करते हुए बीजेपी 2014 से लगातार यूपी में चुनाव जीत रही है. 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए बीजेपी ने अब उन बूथों के डाटा को इकठ्ठा किया है, जहां पर उसे कभी जीत नहीं मिली है. उन बूथों को भी बीजेपी ने तीन कटेगरी A, B, C में बांटा है. A कैटगरी में वो बूथ हैं, जहां पर मेहनत करके बीजेपी के वोट को बढ़ाया जा सकता है और जीत हासिल की जा सकती है. B कटैगरी में वो बूथ हैं, जहां पर मेहनत करके बराबरी पर मुकबाले को लाया जा सकता है. साथ ही C कटैगरी के वो बूथ हैं, जहां पर बीजेपी को बहुत कम 10 से 15 वोट मिले हैं. उन बूथों पर भी काम बीजेपी के कार्यकर्ता कर रहे हैं. बीजेपी का सबसे बड़ा लाभार्थी वर्ग है, उनको इन बूथों पर टारगेट किया जायेगा. इसके लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ड्यूटी लगायी गयी है.

4500 बूथों पर काम शुरू

अगर हम बीजेपी के गोरखपुर क्षेत्र यानी कि गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल की बात करें तो यहां पर 13 लोकसभा सीटें हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 12 सीटों पर जीत हासिल की थी सिर्फ आजमगढ़ में हार मिली थी. जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 10 सीटों पर ही विजय मिली थी. अभी हुए उपचुनाव में आजमगढ़ के फतह के बाद बीजेपी के 11 सांसद हो गये हैं. गोरखपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष धर्मेन्द्र सिंह कहते हैं कि गोरखपुर क्षेत्र में कुल 27 हजार से अधिक बूथ हैं. जिसमें से बीजेपी ने 4500 बूथों को कमजोर मानकर काम करना शुरू कर दिया है. एक लोकसभा में अभी बीजेपी ने 225 बूथ को छांटा हैं, जहां पर उसे काम करना है. इसके लिए सांसद के साथ 30 प्रमुख कार्यकर्ता लगाये गये हैं. सांसद को 100 बूथ की जिम्मेदारी दी गयी है. जहां पर बीजेपी के सांसद नहीं हैं वहां पर राज्यसभा सांसद की ड्यूटी लगायी गयी है. गोरखपुर क्षेत्र में घोषी में बीजेपी ने राज्यसभा सांसद नीरज शेखर तो लालगंज में राज्यसभा सांसद सगीता यादव को लगाया है.

विधायकों की भी लगी ड्यूटी

इसी तरह से एक विधायक को 25 बूथ दिये गये हैं और उनके साथ 10 वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को लगाया गया है. जहां पर बीजेपी के विधायक नहीं हैं वहां पर MLC को लगाया गया है. सांसद और विधायक बूथों पर जाकर वहां पर लोगों से बात करेंगे. साथ ही बीजेपी के एप पर यह कारण अपलोड़ करेंगे अखिर में इस बूथ पर पार्टी कमजोर क्यों है और यहां पर किस तरह से काम करके पार्टी को विजय श्री हासिल करायी जा सकती है. सांसद और विधायक लाभार्थी वर्ग से भी यहां पर बात करेंगे

बीजेपी की जीत के पीछे ये है वजह

राजनीतिक विशलेषक प्रो महेन्द्र सिंह का कहना है कि मोदी और अमित शाह की बीजेपी सिर्फ चुनावों में सक्रिय नहीं होती है. बल्कि एक चुनाव खत्म हुआ तो दूसरे की तैयारी शुरू कर देती है. अपने कमजोरियों को पहचानती है और फिर उसे दूर करने की कोशिश भी करती है. इसीलिए उन बूथों पर फोकस कर रही है जहां पर उसे जीत नहीं मिली है. उस कारण को जानने के बाद वहां भी विजय श्री हासिल करने की कोशिश करेगी. एसी कमरों में बैठकर सिर्फ चुनावी रणनीति नहीं बनाती है, बल्कि जमीन पर काम करती है. बीजेपी को लगातार मिल रही चुनावों में जीत का सबसे बड़ा कारण उसका जमीनी स्तर पर काम करना है. उसे पता है कि किस बूथ पर हमरी स्थिती कमजोर है. और कहां पर मेहनत करने पर सफलता मिल सकती है. इसलिए पार्टी अब सबसे पहले अपने सबसे कमजोर बूथों पर ही काम करना शुरू किया है.

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