17 साल पहले मुखबिर बताकर की थी निर्मम हत्या, कोर्ट ने चार नक्सलियों को सुनाई उम्रकैद की सजा


हाइलाइट्स

17 साल पहले पुलिस का मुखबिर बताकर की थी हत्या
नक्सलियों के एरिया कमांडर संजय कोल को 2007 में ही मार दिया गया था
अदालत ने नक्सलियों को सुनाई उम्रकैद की सजा

रिपोर्ट- रंगेश सिंह

सोनभद्र. उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में न्यायालय ने 17 साल पुराने मामले में 4 नक्सलियों को उम्रकैद और प्रत्येक पर 2 लाख 30 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है. अर्थदंड जमा न करने पर 2-2 साल की और सजा भुगतनी होगी. दरअसल, 17 वर्ष पूर्व पुलिस का मुखबिर बताकर इंद्रकुमार गुर्जर की हत्या की गई थी. सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी/सीएडब्लू सोनभद्र आसुतोष कुमार सिंह की अदालत ने आरोपियों पर दोष सिद्ध पाया. जिसके बाद चार नक्सलियों भोला उर्फ राकेश पाल, गोपी उर्फ किशन गोपाल, विनोद खरवार और कम उर्फ लालव्रत को उम्रकैद एवं प्रत्येक पर 2 लाख 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई. अर्थदंड जमा न करने पर प्रत्येक को 2-2 वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी. वहीं मृतक की पत्नी विद्यावती को अर्थदंड की आधी धनराशि यानी 4 लाख 60 हजार रुपये मिलेगी.

बता दें कि अभियोजन पक्ष के मुताबिक मांची थाने में 3 अगस्त 2005 को तहरीर दी गई थी. तहरीर में मांची थाना क्षेत्र के खोडैला गांव निवासी जय प्रकाश गुर्जर पुत्र स्वर्गीय हीरालाल गुर्जर ने अवगत कराया था कि उसका छोटा भाई इंद्रकुमार गुर्जर 2 अगस्त 2005 को शाम 7:30 बजे अपने घर आ रहा था. तभी अकड़ौलीया के पास नक्सली एरिया कमांडर संजय कोल के साथ चंदौली जिला के नौगढ़ थानांतर्गत जयमोहनी गांव निवासी भोला उर्फ राकेश पाल, दुद्धी कोतवाली क्षेत्र का गोप, कैमूर बिहार के अधौरा थाना क्षेत्र के लोहरा गांव का विनोद खरवार और चंदौली जिला के नौगढ़ थानांतर्गत कमलजी ने पुलिस का मुखबिर बताकर उसकी हत्या कर कर दी. नक्सलियों के साथ करीब अन्य 7-8 नक्सली और थे. नक्सलियों ने उसे रास्ते में पकड़ लिया और पुलिस का मुखबिर बताते हुए उसका हाथ पीछे बांधकर गोली मारकर हत्या कर दी.

दोनों पक्षों को सुनने के बाद दिया फैसला
तहरीर के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर, मामले की विवेचना के बाद पर्याप्त सबूत मिलने पर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया था. खूंखार नक्सली एरिया कमांडर संजय कोल पुलिस मुठभेड़ में वर्ष 2007 में मार दिया गया था. जिसकी वजह से इसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी. अभियोजन की ओर से मांची थाना प्रभारी श्यामबिहारी व पैरोकार रामलखन ने सराहनीय पैरवी की. मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर चारों नक्सलियों को उम्रकैद एवं प्रत्येक पर 2 लाख 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई. नक्सलियों द्वारा जेल में बिताई अवधि भी सजा में समाहित की जाएगी.

Tags: Naxalite, Sonbhadra News, Uttarpradesh news



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